मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान को उसका व्यवहार और तहजीब ही अमीर और गरीब बनाता है। यदि आपके मधुर व्यवहार और कर्म सही नहीं है तो केवल धन दौलत कमाकर अमीर होने का कोई फायदा नहीं है। किसी भी इंसान का व्यक्तित्व इस बात पर निर्भर करता है कि वह कैसे अपने कर्म और मधुर व्यवहार से लोगों के बीच अपनी जगह बनाता है क्योंकि समाज में इंसान की पहचान उसके व्यक्तित्व से ही होती है और व्यक्तित्व ही इंसान का आईना होता है । अमीर बनने का राज़ केवल धन में नहीं है, बल्कि सही सोच, मेहनत और आदतों में है। अमीर बनने के लिए लक्ष्य, निरंतर प्रयास और वित्तीय अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। वहीं, गरीब वही रहता है, जो इन आदतों को अपनाने से कतराता है।
अमीरों का जीवन गरीब इंसान से ज्यादा मुश्किल होता है । उन्हें पता होता है कि सभी लोग स्वार्थवश उससे जुड़े हुए हैं ।जिस दिन उनका स्वार्थ पूरा नहीं होगा, वह उन्हें छोड़़ देंगे । उसके बाबजूद वे उनके साथ रहते हैं । गरीब लोगों की अपेक्षा अमीर लोगों के वृद्धजनों को वृद्धाश्रम में रहते ज्यादा सुना होगा क्योंकि काम न करने की हालत पर उनका परिवार भी उन्हें साथ रखना नहीं चाहता है, जबकि गरीबी की हालत में लोग अपने परिवार के साथ रहते देखे जा सकते हैं । यह भी सच है कि वर्तमान में किसी बड़े आदमी के साथ फोटो खींचवाकर, उसके साथ सम्बंध दिखाकर खुश होना, एक दिमागी गुलामी बन गई है, जो आजकल प्रायः होता है, जबकि संघर्ष ही जिंदगी की पहचान है, जो डर गया, वो सिर्फ नाम है, जो लड़ गया, वही असली इंसान है ।
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

