Thursday, February 26, 2026
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प्रभाशाली व्यक्तियों के दबाव के आगे झुकी सरकार: मात्र 17 दिन में ईमानदार तहसीलदार का तबादला

मूकनायक/ नीरज कुमार

शिमला/ हिमाचल प्रदेश

प्रदेश सरकार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ईमानदार और कर्मठ अधिकारी राजनीति की भेंट चढ़ जाते हैं। उपमंडल संगड़ाह में महज 17 दिन पहले नियुक्त हुए तहसीलदार पवन कुमार का तबादला राजनीतिक दबाव के चलते कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों के अवैध हितों को छेड़ने की वजह से यह कार्रवाई हुई।
तहसीलदार पवन कुमार ने छोटे से कार्यकाल में ही ऐसे कदम उठाए, जिनसे वर्षों से दबे पड़े मुद्दों पर कार्रवाई शुरू हो गई थी। वर्ष 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में बने कानून के तहत “मुजायरो” को मालिकाना हक दिया जाना था, लेकिन 50 साल से अधिक समय गुजरने के बावजूद क्षेत्र के सैकड़ों किसान आज भी कागज़ों में मालिक नहीं बन पाए थे। इस लंबे इंतजार को खत्म करने की दिशा में पहल करते हुए तहसीलदार ने सभी पटवारियों को आदेश दिया था कि 4 सप्ताह के भीतर गैर-मौरूसी जमीन के मालिकों की सूची तैयार कर किसानों को मालिक बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाए। इससे आम किसानों को वर्षों बाद राहत मिलने की उम्मीद जगी थी।

इतना ही नहीं, तहसीलदार पवन कुमार ने शामलात जमीन के बंटवारे में चल रही धांधली को भी उजागर किया और इसकी लिखित सूचना डीसी सिरमौर को दी। यह कदम स्थानीय दबंगों और नेताओं के हितों पर सीधा प्रहार था। नतीजतन, क्षेत्र के प्रभावशाली लोग नाराज हो गए और राजनीतिक दबाव डालकर उनका तबादला करवा दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि लोकतंत्र और सुशासन पर भी करारा तमाचा है। सरकार की कथनी और करनी में फर्क साफ झलक रहा है। एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रशासन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जब कोई अधिकारी वास्तविक सुधार की दिशा में काम करता है तो उसे 17 दिन में ही कुर्सी छोड़नी पड़ती है।

इससे पहले भी तहसीलदार का पद लंबे समय तक खाली रहा। नवंबर से जनवरी तक कोई अधिकारी यहां नहीं था, फिर डेढ़ महीने के लिए अतर सिंह ने पद संभाला और फरवरी में सेवानिवृत्त हो गए। जुलाई में पवन कुमार ने कार्यभार संभाला, लेकिन 17 दिन बाद ही राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार बन गए।

जनता का कहना है कि यह तबादला साफ तौर पर सत्ता के दबाव में लिया गया फैसला है, जिसने ईमानदार प्रशासनिक तंत्र की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है। लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार तुरंत इस तबादले को रद्द कर पवन कुमार को दोबारा संगड़ाह तहसील में तैनात करे, ताकि किसानों और आम जनता को न्याय मिल सके।

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