Thursday, February 26, 2026
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गोपीचंद गेलानी को न्यायालय का दोबारा नोटिस,अगली सुनवाई 29 सितंबर को

महापौर–पार्षद अयोग्यता मामला: अब बढ़ीं कानूनी मुश्किलें

मूकनायक,बद्री विशाल प्रजापति सतना मध्य प्रदेश

सतना/ नगर निगम सतना के महापौर योगेश ताम्रकार और वार्ड 21 के पार्षद गोपीचंद गेलानी पर *पद से अयोग्यता की तलवार* और तेज हो गई है। लाखों रुपये के टैक्स बकाये को लेकर दायर व्यवहार वाद की सुनवाई अब अगले महीने होगी।*टैक्स बकाये का मामला*महापौर योगेश ताम्रकार की फर्म विंध्य सिरामिक्स पर करीब ₹67 लाख का नगर निगम टैक्स बकाया है।पार्षद गोपीचंद गेलानी की फर्म यूनिवर्सल स्टोन एंड मार्बल पर करीब ₹16 लाख से अधिक की टैक्स बकाया राशि लंबित है।नगर निगम द्वारा इनकी वसूली को लेकर पूर्व से ही कार्यवाही जारी है।*न्यायालय की सख्ती*याचिकाकर्ता डॉ अमित सिंह के *अधिवक्ता नरेशचंद्र त्रिपाठी* ने बताया कि 8 जुलाई को *जिला एवं सत्र न्यायालय, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड* ने RCS प्रकरण *क्रमांक 287/25 और 288/25* में शासन व संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 19 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया था।19 अगस्त को नगर निगम आयुक्त और महापौर की ओर से अधिवक्ता उपस्थित हुए।20 अगस्त को सतना कलेक्टर की ओर से भी अधिवक्ता हाजिर हुए।न्यायालय द्वारा भेजा गया नोटिस पार्षद गेलानी के पते से वापस लौट आया। इस पर अदालत ने पुनः नोटिस जारी कर 29 सितंबर को अनिवार्य रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।*अयोग्यता से जुड़ी धाराएँ*मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 26 और धारा 17 (3) के अनुसार – यदि कोई जनप्रतिनिधि नगर पालिक निगम/नगर पालिका का बकायेदार है और नोटिस जारी होने के 3 माह के अंदर बकाया राशि अदा नहीं करता, तो वह पद के लिए *अयोग्य माना जाएगा*।📢 *याचिकाकर्ता डॉ. अमित सिंह का बयान*आम आदमी पार्टी सतना के जिलाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने कहा—🗣️ “यह मामला सिर्फ टैक्स बकाये का भर का नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के विश्वास से जुड़ा सवाल है। जो लोग करोड़ों रुपये का बकाया चुकाने में असफल रहे, वे जनता के प्रतिनिधि पद पर बने रहने के नैतिक और कानूनी अधिकार खो चुके हैं। अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट है कि अब कानून और जनता दोनों का धैर्य जवाब दे रहा है। हमारी लड़ाई पारदर्शिता और जवाबदेही की है, और हम इसे अंत तक लड़ेंगे।”⏭️ अगला कदमइस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2025 को होगी। माना जा रहा है कि इस दिन दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सामने आएंगी और अयोग्यता के मुद्दे पर निर्णायक बहस शुरू होगी।

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