Thursday, February 26, 2026
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बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना दिवस को पंचशील बुद्ध विहार के सदस्यों ने याद किया

मूकनायक/ स्वराज मैश्राम
बिलासपुर छत्तीसगढ़

बिलासपुर। 20 जुलाई का दिन बहुजन इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय को समर्पित है। ठीक आज ही के दिन, वर्ष 1924 में भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने सामाजिक और शैक्षणिक बहिष्करण झेल रहे समाज के उत्थान हेतु “बहिष्कृत हितकारिणी सभा” की स्थापना की थी। यह संस्था उन ऐतिहासिक प्रयासों का प्रारंभिक और संगठित स्वरूप था जिसने भारत में अछूत समझे गए वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को एक वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक आयाम दिया पंचशील बुद्ध विहार के सक्रिय उपासकों द्वारा आज इस ऐतिहासिक दिवस को सम्मान और गरीमा के साथ याद किया और इसे सामूहिक चर्चा एवं चिंतन का केंद्र बनाया गया। जिसमें बहिष्कृत हितकारिणी सभा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उद्देश्य, कार्यप्रणाली और उसकी विरासत पर प्रकाश डाला गया। रखे

डॉ. आंबेडकर द्वारा 20 जुलाई 1924 को बंबई में स्थापित इस संस्था का मूल उद्देश्य था।दलित वर्गों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार (छात्रावास खोलकर, अध्ययन मंडलियाँ बनाकर),सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना,दलितों की समस्याओं और शिकायतों का प्रतिनिधित्व सरकार के समक्ष करना।

सभा के प्रमुख सदस्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित व्यक्तित्व थे, जिनमें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अध्यक्ष के रूप में, एस.एन. शिवतरकर सचिव, और एन.टी. जाधव खजांची थे। और मेयर निसिम, जे.पी., रुस्तमजी जिनवाला, जी.के. नरीमन, डॉ. आर.पी. परांजपे, डॉ. वी.पी. चव्हाण, बी.जी. खेर जैसे प्रबुद्ध सहयोगी उपाध्यक्ष व सॉलिसिटर के रूप में जुड़े।सभा के माध्यम से 4 जनवरी 1925 को सोलापुर में शोषित वर्ग के छात्रों हेतु एक छात्रावास की स्थापना की गई, जिसका प्रबंधन श्री जीवप्पा सुबा आयडेल को सौंपा गया।

यही सभा आगे चलकर अछूतों को सार्वजनिक जलस्रोतों से पानी पीने के अधिकार के लिए किए गए महाड़ सत्याग्रह जैसी क्रांतिकारी घटनाओं की जननी बनी। यह आंदोलन सिर्फ पानी के अधिकार की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और समानता की ऐतिहासिक लड़ाई का प्रतीक बन गया।डॉ. आंबेडकर द्वारा दिए गए मूलमंत्र “शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो” को सभा के प्रत्येक कार्य और उद्देश्य में आत्मसात किया गया। यह मंत्र आज भी सामाजिक परिवर्तन के पथिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

आज पंचशील बुद्ध विहार में इस महान स्थापना दिवस को स्मरण करते हुए सभी उपासकों ने मिलकर इस ऐतिहासिक दिन को याद किया और यह संकल्प लिया कि बहिष्कृत हितकारिणी सभा की विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुंचाया जाएगा। यह दिन न केवल स्मरण का है, बल्कि सामाजिक बदलाव की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का अवसर भी है।

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