लाखों की हुई हेरा फेरी,फिर भी अधिकारी बैठे अपनी चुप्पी साधे
मूकनायक/ सीताराम बमनिया
देवास /मध्य प्रदेश
जी हां विगत दिवस सोनकच्छ तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम चौबारा जागीर में हो रही धांधली के बारे में प्रकाशन के माध्यम से शासन प्रशासन को बताया गया था कि आजीविका मिशन के तहत चल रही योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार,मिशन द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाली सहायता राशि में गड़बड़ी की गई है। शिकायतें हैं स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने अपने पद का दुरुपयोग राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) एक केंद्र सरकार की योजना है। जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता, परशिक्षण और उद्यमिता को अवसर दिया जाए शासन की योजनाएं तो हैं,बजट भी है। लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही है। ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे आजीविका मिशन के तहत न तो योजनाओं का लाभ मिल रहा है,और न ही महिलाओं की मेहनत का सम्मान। अधिकांश महिलाएं असंत कुष्ट हों और कह रही हों का काम धरातल पर क नज़र नहीं आ रहा। महिलाओं का कहना है कि जब वे किसी योजना के कार्यान्वयन या खर्च का हिसाब मांगती हैं। तो मिशन के कर्मचारी उन्हें डरा-धमकाकर चुप करा देते हैं। कई बार तो समूह की महिलाओं को ही “डिफॉल्टर” या “फॉल्ट करने वाली” बता दिया जाता है, जिससे उनका आत्मविश्वास टूटता है और वे योजना से पीछे हटन को मजबूर हो जाती हैं। योजनाओं के नाम पर ले कागज़ी खानापूर्ति हो रही है। कोई भी योजना पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है। लाभार्थियों को उनके हक की जानकारी तक नहीं दी जाती। और जब सवाल पूछे जाते है, तो कर मचारियों का खया धमकी भरा हो जाता है। वही इस मामले ने तो भ्रष्टाचार में भी सबको पीछे कर दिया। आजीविका मिशन के अधिकारियों से साट घाट कर अध्यक्ष कर रहे हैं अपनी मनमानी। वहीं अध्यक्ष के पास ही अनेक पद है। और ग्रामीण आजीविका मिशन के सदस्य द्वारा कोई जानकारी या पूछ ताछ या हिसाब मांगते हैं तो अब्द्राता पूर्वक बात की जाती है। पहले एक सदस्य के पास सचिव का पद था तो बिना उनकी अनुमति और सूचना भी नहीं दी। ओर बिना किसी बात की गलती के बिना ही हटा दिया गया। और पेड़ पौधे और जो मुर्गा पालन के लिए भी आजीविका मिशन के अधिकारी द्वारा पैसे लिए गए उसकी रिसिप्ट तक नहीं दी गई। और यहां तक कि अध्यक्ष के पास चक्की और अनेक सुविधा बाकी सोसाइटी समूह के मेला योजना से वंचित किया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विजेंद्र परमार के रिश्तेदार होने के कारण एक ही पद महिला अध्यक्ष को दिए गए हैं जो कि सरासर शासकीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दिखाई दे रहा है। और विजेंद्र परमार द्वारा समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं को डरा चमक कर एक किनारा कर दिया गया वही वही समूह की अन्य महिलाओं ने आरोप लगाया कि विजेंद्र परमार सर सारी योजना का लाभ रिश्तेदार होने के कारण एक ही महिला को सारा फायदा दे रहे हैं। यदि शासन प्रशासन द्वारा इस विषय में जब बैठे तो लाखों का गबन उजागर हो सकता है और मनमानी कर रहे। विजेंद्र परमार पर दंडात्मक कार्रवाई शासन द्वारा की जानी चाहिए। वही अब इस मामले को लेकर सोनकच्छ जनपद पंचायत सीईओ एवं सोनकच्छ एसडीएम महोदय को अवगत कराया अब देखना यह है कि इस विषय में अधिकारी द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है।
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