देशराज मूकनायक (रामपुर ) रामपुर से रिटायर्ड आई ए एस अधिकारी प्रेम सिंह ध्रैक ने आज ननखरी में ग्रामीणों को वन अधिकार अधिनियम बारे जानकारी दी | आई ए एस अधिकारी प्रेम सिंह ध्रैक ने कहा की हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन अधिकार अधिनियम (FRA) को लागू करने का फैसला लिया है। जिसको सरकार मिशन मोड में चला रही है जिसके लिए सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद। उन्होंने वन अधिकार अधिनियम क्या है? ुर यह कैसे काम करेगा इस बारे लोगों को समझाते हुए उन्होंने कहा की जिन लोगों के अधिकार बनते थे, और वह दर्ज नहीं हुए अब उन अधिकारों को दर्ज करने का एक मौका है | जो एक बड़ा मौका साबित हो सकता है। इसीलिए सभी जो पात्र है अपने वन अधिकार का इस अधिनियम के तहत समय रहते लाभ ले सकते है | साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2002 में सरकार ने इसी मंशा से यह नीति बनाई थी जो हाई कोर्ट में चैलेंज हुई थी। और उसके बाद भी कैसे अब तक चल रही हैं। नीति और अधिनियम में फर्क होता है नीति राज्य की मौजूदा सरकार नियमों के तहत बनाती है जबकि अधिनियम भारत सरकार के संसद के द्वारा बनाए जाते हैं। वन अधिकार अधिनियम भी भारत सरकार की संसद के द्वारा बनाया गया है। जिससे सुप्रीम कोर्ट ने नकारा नहीं बल्कि इस अधिनियम के पक्ष में साथ दिया। वन अधिकार अधिनियम के तहत भारत के कई राज्य में लगभग 21 लाख लोगों को पट्टे दिए जा चुके हैं। इसीलिए लोग इस नियम में शंका न करें यह एक जांचा परखा हुआ अधिनियम है। और उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में इस अधिनियम के तहत जो फाइलें बनाई गई थी वह भी आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। क्योंकि वन अधिकार अधिनियम में 13 दिसंबर 2005 से पहले जिस भूमि पर जो भी कागज माल में काबिज था और अधिनियम के तहत बाकी योग्यताओं को पूरी करता हो और इस बात को साबित करता है कि भूमि आपके कब्जे में है वह फाइलें भी आपके लिए बतौर सबूत उपयोगी होगी इस अधिनियम को लागू करने की ताकत सरकार ने ग्राम सभा में चुनी हुई वन अधिकार कमेटी दी है ताकि इसका फैसला आप लोगों के द्वारा आप लोगों के बीच में सही तरीके से हो सके |

