मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सच हमेशा कड़वा होता है, इसलिए कड़वा लगता है । सच्चाई का सामना करने का साहस हर किसी में नहीं होता, लगभग हर कोई इससे दूर भागना पसंद करता है । सभी इससे बचने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन जब कभी इस का सामना हो जाता है तो यह लोगों का जीना हराम कर देता है क्योंकि सच तो सच होता है, इसको लाख छुपाने के बावजूद भी यह उभर कर सामने आ ही जाता है और जब उभरकर सामने आता है तो इससे जुड़े हुए व्यक्ति को या तो बचा देता है या उसे बर्बाद कर देता है । यदि व्यक्ति सही है तो यह साबित होने पर किसी कारण से किसी समस्या में फंसा हुआ व्यक्ति बच जाता है, उस समस्या से उसका निदान हो जाता है और इसके विपरीत वह व्यक्ति जो दूसरे को जबरदस्ती किसी मुसीबत में फंसा रहा होता है तो वह व्यक्ति सच सामने आने पर मारा जाता है अर्थात् उसकी चोरी पकड़ी जाती है, उसका झूठ पकड़ा जाता है और वह सजा का पात्र होता है ।
वहीं मधुर वाणी का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। यह हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर दोनों ही तरह से लाभ पहुंचाती है। हमें हमेशा मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए ताकि हम अपने जीवन को और अधिक सुखद बना सकें। मीठा बोलने में कोई खर्च नहीं होता , फिर भी कुछ लोग हमेशा कड़वा ही बोलते है, जबकि जीवन के कुछ कड़वे घूंट, जिन्हें हर मनुष्य को पीना पड़ता है । मधुर वाणी का महत्व बहुत अधिक है। यह हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर दोनों ही तरह से लाभ पहुंचाती है। हमें हमेशा मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए ताकि हम अपने जीवन को और अधिक सुखद बना सकें। कबीर दास जी अपने दोहे में कहते हैं कि “ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए। औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।” अर्थात् हमें ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो मन को शांति दे, दूसरों को सुखद लगे और खुद को भी शांत करे।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

