
मूकनायक
छत्तीसगढ़
बहुजनों की आई रमाई का जन्म 7फरवरी 1894को रत्नागिरी जिले के वणंद गांव में हुआ था!पिता का नाम भीखु धोत्रे,माता का नाम रूक्मणी था।माता पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था।उसके बाद उनके मामा ने सभी भाई बहनों को लेकर बंबई के भायकला आ गये थे।उनके पिता मछली विक्रय का काम करते थे।
बाबा साहब से उनका विवाह 4अप्रैल 1906में हुआ था। तब उनकी उम्र 9वर्षकी थी बाबासाहेब 15वर्ष के थे। बाबा साहब रमाई को रामु तथा रमाई बाबा साहब को साहब कहकर संबोधित करती थी।1941में लिखी थाट्स आफ पाकिस्तान बाबा साहब ने उनकी स्मृति में भेंट की।
उनका त्याग इतना गहरा हैं जिसके वर्णन के लिए शब्द छोटे पड़ जायेंगे।भुखे प्यासे रहते हुए बाबासाहेब के अध्ययन में कोई बाधा ना पड़े इसलिए कष्टों को सहा।कंडे बीनकर उससे आये पैसों को बाबासाहेब को लंदन भेजा।इस तरह कष्टों को झेलने के कारण उनका शरीर दुर्बल हो गया। अंत समय में बाबासाहेब को पंढरपुर दर्शन का मन बताया किंतु बाबासाहेब ने उनको अपना अलग पंढरपुर बनाने की बात कही। यह बौद्ध धर्म ग्रहण करने की इच्छा शक्ति से मजबूत हुई लेकिन रमाई का साथ छुट चुका था। एक बार रमाई किसी स्कुल में बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है यह देखने गई तब पता चला कि बच्चों ने दो दिन से खाना नहीं खाया था! तब उन्होंने अपने हाथ के कंगन बेचकर उन बच्चों के लिए राशन का प्रबंध कराया। एैसी हमारी रमाई थी। उनका दुःखद निधन 27मई1935में हुआ। बाबासाहेब फुट फुटकर रोये तथा एक महीने अपने कमरे से बाहर नहीं निकले। आज हम लोग ऐैशो आराम का जीवन उनकी त्याग और समर्पण के कारण जी रहें हैं। उनका ऋण नहीं चुकाया जा सकता है।
➖( योगेश मानवटकर)

