मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज के समय में लोग रिश्तों को तोलने लगते हैं, उसमें अपना लाभ और हानि देखने लगते हैं, लेकिन ध्यान रहे, ऐसे रिश्ते ज्यादा दिनों तक नहीं टिकते हैं। एक सच्चा मित्र या रिश्ता वही होता है, जो अच्छे और बुरे दोनों वक्त में आपके साथ खड़ा हो। इसलिए बुरे वक्त में अपनों को साथ जरुर देना चाहिए। जो लोग रिश्तों में लाभ- हानि देखते हैं, वे लोग कभी दिल से रिश्ते नहीं बनाते हैं और दिमाग से बनाए गए रिश्तों में केवल व्यापार होता है, प्यार नहीं। रिश्ते तभी प्रगाढ़़ होते हैं, जब हम अच्छे व्यवहार से उन्हें सजाते हैं। रिश्तों में गहराई के लिए जरूरी है कि एक-दूसरे को समझ कर जिएं। कभी-कभी नजरअंदाजी करने से रिश्तों में खटास आ जाती है। अगर अपनों की कद्र करेंगे, आपसी विश्वास कायम रखेंगे तो रिश्ते की डोर और मजबूत होगी। रिश्तों में मेलजोल या बातचीत की कमी आती है, तब भी रिश्ते निरंतर बिखरने लगते हैं।
कर्तव्य और प्रेम रिश्तें की नींव हैं। इन्हीं पर चलकर आप रिश्तों को मजबूती दे सकते हैं। आपको हर दिन मेहनत करनी होगी, आपको अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना होगा, आपको प्रेम से इसे निभाना होगा। रिश्तों को निभाने के लिए परस्पर सामंजस्य बैठाना ही होगा । रिश्तों का स्वरूप भी बदलता रहता है, इसे नकारात्मक न लें बल्कि समय की मांग को समझे। अपनी गलती को कभी स्वीकार करें तो कभी सामने वाले की गलती को नजरअंदाज करें, कभी – कभी खुद से पहले सामने वाले की खुशी को रखें । इसलिए समय, प्रेम और सम्मान से हमेशा रिश्तों को सँवारे और खुशहाल रहकर जीवन का आनंद लें।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

