Thursday, February 26, 2026
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BUDDHISTH MONUMENT -341

मूकनायक/ देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा


🖊️महाराष्ट्र > जिला रायगढ़ > सुधागढ़ तालुका > नेनवली गांव > नेनावली गुफाएं या खडसाम्बले गुफाएं.
ジャラサンダ塚 > アサンド
🏯☸️🏺⚙️💱〽️🪙🗿
✒️𝗚𝗘𝗡𝗘𝗥𝗔𝗟 𝗜𝗡𝗙𝗢𝗥𝗠𝗔𝗧𝗜𝗢𝗡 महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के सुधागढ़ तालुका में स्थित खडसाम्बले या नेनावली गुफाएँ 37 चट्टानों को काटकर बनाई गई बौद्ध गुफाओं का समूह हैं। इसकी बनावट, इसकी स्थापत्य शैली और वहां के स्तूपों की डिजाइन के कारण, हमें इस प्रकार के स्तूप अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलते।
👉🏻𝗡𝗘𝗔𝗥𝗘𝗦𝗧 𝗣𝗟𝗔𝗖𝗘 ये गुफाएं नाडसूर गुफाओं (थानाल गुफाओं) से 9 किमी दक्षिण में स्थित हैं। ऊपरी हिस्से पाली से 35 किमी दूर हैं।
👉🏻𝗚𝗘𝗢𝗚𝗥𝗔𝗣𝗛𝗜𝗖𝗔𝗟 𝗦𝗖𝗘𝗡𝗔𝗥𝗜𝗢 यदि आप पुराने प्राचीन व्यापार मार्ग और बौद्ध वास्तुकला की खोज करना चाहते हैं तो इकोले – केवने – खडसम्बल गुफा ट्रेक सर्वश्रेष्ठ ऑफ बीट हेरिटेज ट्रेक है। गुफाएँ केवनी के मुख्य पर्वत के पूर्वी छोर पर ऊपरी पहुँच में है, पहाड़ का आधार घने जंगल से ढका हुआ था, इसलिए निचले पठार से गुफाओं को आसानी से नहीं देखा जा सकता था।
👉🏻𝗛𝗜𝗦𝗧𝗢𝗥𝗬 इन गुफाओं का पत्थर लाल रंग का बलूवा पत्थर और ज्यादा टिकाऊ नहीं है जिस कारण इन गुफाओं को काफी नुकसान हुआ है ।शोधकर्ताओं का कहना है कि यहां पर 30 से 48 गुफा समूह है कुछ लोग केवल 21 गुफाओं का ही जिक्र करते हैं. इन गुफाओं में शिलालेख हो सकते थे लगभग सभी गुफाओं के प्रवेश द्वार नष्ट हो चुके हैं भाव के मुख्य चप्पल के बगल में 17 भिक्षुओं के आवास है। फिर भी इस गुफाओं की सुंदरता अद्भुत थी कई गुफाओं का अग्र भाग नष्ट हो गया केवल छठ का हिस्सा ही सुरक्षित बच्चा है। कजिन्स ने भी इन गुफाओं का समय दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व बताया है। इसके अलावा एमएन देशपांडे ने भी इसकी पुष्टि की है। वे नाडसूर में पाए गए बलि सिक्कों से भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं।
👉🏻𝗗𝗜𝗦𝗖𝗢𝗩𝗘𝗥𝗘𝗥 ये गुफाएँ चौल बंदरगाह (कोंकण) से पुणे (देश) तक के प्राचीन व्यापार मार्ग पर स्थित हैं। इन गुफाओं की खोज सबसे पहले अंग्रेज अधिकारी हेनरी कूसेंस ने वर्ष 1881 में की थी।
👉🏻𝗛𝗜𝗦𝗧𝗢𝗥𝗜𝗖𝗔𝗟 𝗜𝗠𝗣𝗢𝗥𝗧𝗔𝗡𝗖𝗘 इन गुफाओं का अधिक अध्ययन वहीं जाकर किया जा सकता है ,इसके बारे में हम ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त कर सके। उनकी बनावट इनकी स्थापित शैली और वहां की स्तूपों के डिजाइन के कारण इस प्रकार के स्तूप हमें अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलते हैं। बाकी स्तूप मूर्ति कला से समृद्ध है इसलिए यह कहना सुरक्षित है कि उन गुफाओं में एक अनूठी विशेषता है जो खड़संभाले गुफाएं नैनवाली गांव में है। इसलिए इन्हें नैनवाली गुफाएं कहा जाता है। इन गुफाओं को यह नाम ब्रिटिश विद्वानों ने दिया था जो की खड़संभले गांव से आए थे। इन गुफाओं की प्रमुख विशेषता यह है कि एक तरफ थानेले यानी नाडुदुर गुफाएं हैं तो दूसरी तरफ गोमाशी गुफाएं हैं। दोनों ही बौद्ध गुफाएं हैं। गोमाशी एक छोटी गुफा है जिसमें जमीन को स्पर्श करती हुई मुद्रा में भगवान बुद्ध की एक बड़ी सी मूर्ति है।
👉🏻𝗖𝗢𝗡𝗦𝗧𝗥𝗨𝗖𝗧𝗜𝗢𝗡 𝗔𝗡𝗗 𝗙𝗘𝗔𝗧𝗨𝗥𝗘 गुफा के एक भाग में दो अर्धनिर्मित स्तूपों के अवशेष पाए गए हैं। स्तूप के बगल में एक विशाल भूमिगत विहार है। गुफा संख्या 1 आंशिक गुफा प्रतीत होती है, इसके अवशेष चारों ओर फैले हुए हैं। गुफा संख्या दो की केवल पिछली दीवार ही पहचानी जा सकती है; उसके सामने की बाकी आकाशगंगा नष्ट हो चुकी है। गुफा संख्या चार में दीवार के अवशेष छत से चिपके हुए दिखाई देते हैं। इसके अलावा, दीवारें पूरी तरह से ढह गई हैं और सामने का हिस्सा नष्ट हो गया है। गुफा संख्या छह की गहराई ही पहचानी जा सकी है। इस कमरे की पिछली दीवार में एक आला है। गुफा संख्या सात भी ऐसी ही स्थिति में है; पीछे वाला कमरा पहचाना जा सकता है।
👉🏻𝗖𝗨𝗥𝗥𝗘𝗡𝗧 𝗦𝗖𝗘𝗡𝗔𝗥𝗜𝗢 ये लगभग 30 से अधिक कक्षों की एक श्रृंखला हैं और पहली शताब्दी ईसा पूर्व खुदी हुई हैं। इनके केंद्र में एक स्तूप है। अंदर कक्षों और प्लेटफार्मों के अलावा, अंदर बहुत अधिक नक्काशी या कोई अवशेष नहीं है। अधिकांश गुफाएं पहाड़ी ढहने से नष्ट हो गई हैं, लगभग सभी गुफाओं के प्रवेश द्वार नष्ट हो चुके हैं। गुफाओं के मुख्य चैपल के बगल में 17 भिक्षुओं के आवास हैं। कई गुफाओं का अग्रभाग नष्ट हो गया है, केवल छत का हिस्सा ही सुरक्षित बचा है। चट्टान के पार गुफाओं का एक समूह जो लगभग 80 वर्ग मीटर के क्षेत्र को कवर करती हैं। इस स्थान पर कुल 42 पंक्तियाँ हैं। इस स्थान पर लगभग 50 भिक्षुओं के शयन की व्यवस्था रही होगी। इसके अलावा यहां 50 से अधिक भिक्षुओं के लिए आवास की व्यवस्था भी की गई होगी।
👉🏻𝗙𝗨𝗧𝗨𝗥𝗘 इन गुफाओं का संरक्षण और इन्हें अपनी मूल पहचान देने के लिए स्थानीय जन समुदाय, बौद्ध अनुयाई एवं प्रशासन को मिलकर कार्य करना ही होगा। जिससे हम इन ऐतिहासिक धरोहर को संजोए रख पाए।अगर महाराष्ट्र की इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित नहीं किया गया तो निकट भविष्य में यह नैनवाली गुफाएं भी नष्ट हो जाएगी। भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा यहां पर अति शीघ्र कार्य करने की आवश्यकता है साथ ही बौद्ध समुदाय यहां जाकर सामाजिक स्तर से भी साफ सफाई और ध्यान साधना पूजा वंदना करें तो भी इन गुफाओं को अपनी पहचान वापस प्राप्त हो सकती है।
✍🏻𝗖𝗼𝗺𝗽𝗶𝗹𝗲𝗱 𝗯𝘆 𝗥𝗣𝗗𝗦 𝗡𝗔𝗥𝗘𝗡𝗗𝗥𝗔 𝗠𝗘𝗦𝗛𝗥𝗔𝗠

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