थाईलैंड की राजधानी बैंगकॉक से 180 किमी दूर पटाया शहर में यात्रियों ने तीन दिनों तक विभिन्न बौद्ध एवं अन्य मनमोहक पर्यटक स्थलों का भ्रमण कर आनंद लिया।
1=टाइगर शो देखा 👉चौथे दिन 3 फरवरी, 2025 की सुबह का नाश्ता होटल सीजन में करने के बाद यात्रियों को लेकर दोनों बसें 9 बजे रवाना हुई। बस में ही सभी ने तीन शरण और पंचशील ग्रहण किए। एक घंटा की यात्रा के बाद टाइगर टोपिया नामक विकसित वन्य स्थान पर पहुंचे जहां रोमांचकारी एशियन टाइगर शो देखा।
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2=बैंगकॉक में गोल्डन बुद्धा का दर्शन लाभ 👉 टाइगर टोपिया से लगभग 11 बजे बसें राजधानी बैंगकॉक के लिए रवाना हुई। बैंगकॉक शहर आधुनिक सुविधाओं से लैश दुनियां भर के गिने चुने विकसित शहरों में से एक है। उच्च गुणवत्ता की सड़कें, गगनचुंबी खूबसूरत होटल्स, टावर्स, इमारतें अनायास ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। सभी यात्री लगभग 12.30 बजे बुद्ध विहार पर पहुंचे जिसमें दुनियां की सबसे भारी स्वर्ण निर्मित बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्थापित है। गाइड द्वारा इस बुद्ध प्रतिमा का भजन 5,550 किलो अर्थात 5.टन बताया गया।
गाइड से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस स्वर्ण बुद्ध प्रतिमा का निर्माण कई सौ साल पहले ग्रामीण बौद्ध अनुयायियों करवाया था। बर्मी आक्रमणकारियों से इसको सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने इस प्रतिमा के ऊपर सीमेंट आदिका लेप लगा दिया और वहां से भाग गए। कालांतर में अंग्रेजों औपनिवेशिक शासन काल में रोड का निर्माण करते वक्त मिली जिसे उन्होंने बैंकॉक में भव्य बुद्ध विहार का निर्माण करवा कर स्थापित कर दिया। यहां के बाद सभी यात्रियों ने दोपहर का भजन रेजीडेंसी होटल में किया और वापस होटल बैंकॉक में आकर सभी को कमरे अलॉट किए गए।
3=क्रूज(समुद्री जहाज) पर रात्रि का भोजन
👉शाम के समय सभी यात्री बस द्वारा समुद्र में क्रूस पर पहुंचे जहां पर यूरोपियन संस्कृत में सभी लोगों ने बैठकर चलते हुए जहाज में संगीत में वातावरण में भोजन का आनंद लिया रात्रि 10:00बजे वापस होटल बैंगकॉक पैलेस में आकर आराम किया।
रिपोर्ट संकलनकर्ता राजवीर सिंह बौद्ध प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश पश्चिमांचल एवं ग्रुप व्यवस्थापक

