मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
बहुजनों के मसीहा,महानायक, क्रांतिकारी महान तपॅस्वी, महान त्यागी, बहुजनों के मार्ग दर्शक और वैज्ञानिक से बने समाजिक वैज्ञानी मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी के त्याग और संघर्ष भरे जीवन की दास्तान हम आपके साथ सांझा करते हैं।
उपरोक्त शब्द साहेब के द्वारा 1996 में बी.एस.पी. कांग्रेस के संयुक्त मंच से तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की उपस्थिति में कहे थे। हुआ कुछ यूँ कि 1996 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस का आपस में गठजोड़ था। साहेब की एक शर्त थी कि कुछ मंच उनके साथ नरसिम्हा राव भी साझा करेंगे।शर्त मान ली गई।
जिस दिन आगरा में साहेब के साथ नरसिम्हा राव ने मंच साझा किया उसी दिन उस रैली के दौरान इतनी जबरदस्त आँधी आई कि एक कार्यकर्ता को दूसरे कार्यकर्ता का चेहरा भी दिखाई देना बंद हो गया। उसके बाद तूफान रुका ही था कि तेज़ बरसात होने लगी और देखते ही देखते कार्यकर्ताओं के घुटनों तक पानी आ गया। आखिर, बरसात रुकी। धूल-मिट्टी बैठ चुकी थी। माहौल फिर से हरकत में आ गया।
मंच पर बोलने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव उठे और कार्यकर्ताओं से मुखातिब होकर कहने लगे- मंच पर विराजमान पूजनीय साहेब कांशी राम और मेरी आदरणीय बहन मायावती जी। जिन्दगी में मैंने राजनीति में भले ही कम वक्त गुजारा है, लेकिन मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूँ कि किसी नेता के प्रति कार्यकर्ताओं में इतना दीवानापन मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी नहीं देखा, जो दीवानापन कांशी राम जी या मायावती जी के लिए देखा है। इस बड़े तूफ़ान में भी लोगों ने अपने पैरों की जमीन तक नहीं छोड़ी है। जो तूफान से पहले जहाँ बैठा था, तूफान रुकने के बाद भी वही बैठा नजर आया। इतना बड़ा जुनून तो मैंने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में भी नहीं देखा। आपका यह जुनून भविष्य में सफल होने वाला है। एक दिन आपके हाथ में सत्ता आएगी और आप लोग देश का सुधार करोगे। जो लोग असमानता भरी जिन्दगी जी रहे हैं, उन्हें समानता और सम्मान मिलकर रहेगा।
नरसिम्हा राव के बोलने के बाद साहेब ने कार्यकर्ताओं से मुखातिब होकर केवल इतना ही कहा- जिस कांग्रेस ने आपको लूटा, पीटा और हर तरह का नुकसान पहुँचाया, अब वही कांग्रेस हमारे मंच पर हमारे साथ बैठी नज़र आ रही है। और आपको इस से एक सबक जरूर लेना चाहिए कि बहुजन समाज की ताकत को अब तो हमारे विरोधी भी समझने लगे हैं।
मेरी लड़ाई ब्राह्मण-बनिया से नहीं, ब्राह्मणवाद से है। ब्राह्मणवाद के आधार पर जो व्यवस्था बनाई गई है, उसके आधार पर कोई बड़ा तो कोई छोटा है। इसलिए हम सामाजिक परिवर्तन की बात करते हैं। छुआछूत, ऊँच-नीच को हटा कर बराबरी और बंधुत्व वाला समाज बनाना चाहते हैं -साहेब कांशीराम।
प्रस्तुत करते है।
इंजीनियर तेजपाल सिंह
94177-94756
जुॅग पलटाऊ बहुजन महां-नायक
पुस्तक -मैं कांशीराम बोलता हूं।
पम्मी लालो मजारा (बंगा नवांशहर)।
95011-43755

