Tuesday, October 20, 2026
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हिण्डौन नगर परिषद में धरने को लेकर विवाद, सभापति सहित पार्षदों ने सौंपा ज्ञापन

मूकनायक / रिपोर्टर धर्मवीर गौतम / हिंडौन सिटी

पार्षद विष्णु प्रजापति के धरने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद; प्रशासन से निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग

हिण्डौन सिटी। नगर परिषद हिण्डौन सिटी में पार्षद विष्णु प्रजापति के धरने को लेकर विवाद सामने आया है। मामले में सभापति विजय चतुर्वेदी सहित नगर परिषद के पार्षदों ने उपखंड प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर संबंधित मामले की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक करौली सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।

ज्ञापन के अनुसार, 12 अक्टूबर को आयोजित नगर परिषद की साधारण सभा की बैठक में पार्षद विष्णु प्रजापति को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया था। ज्ञापन देने वाले पार्षदों का कहना है कि बैठक में एजेंडे के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई और सहमति बनी थी। इसके बावजूद बैठक के बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।

धरने को लेकर लगाए आरोप

ज्ञापन में सभापति सहित पार्षदों ने आरोप लगाया है कि बैठक के बाद विष्णु प्रजापति ने अन्य पार्षदों पर दबाव बनाने का प्रयास किया। उन्होंने उपखंड कार्यालय के बाहर चल रहे धरने को नवगठित नगर परिषद बोर्ड की छवि प्रभावित करने वाला बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, ये आरोप ज्ञापन देने वाले पक्ष की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

धरने पर बैठे पार्षद का पक्ष भी महत्वपूर्ण

मामले में पार्षद विष्णु प्रजापति के धरने के पीछे के कारणों और ज्ञापन में लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। उपलब्ध जानकारी में उनके आरोपों या प्रतिक्रिया का विस्तृत विवरण नहीं है। ऐसे में मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट करने के लिए दोनों पक्षों की बात और संबंधित दस्तावेजों का सामने आना जरूरी है।

प्रशासनिक जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

ज्ञापन में संबंधित पार्षद द्वारा पूर्व में भी धरना-प्रदर्शन किए जाने का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से जांच या कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

नगर परिषद से जुड़े इस विवाद में वास्तविक स्थिति तथ्यों, संबंधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

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