3 अक्टूबर 1974 को स्थापित बालाघाट जिला बौद्ध संघ की स्थापना दिवस पर बुद्ध-अम्बेडकर अनुयायियों को बधाई — पंजीयन यथावत होने का दावा, आगामी समय में विधिवत चुनाव की तैयारी
मूकनायक समाचार —/ सत्यशील गोंडाने / बालाघाट (मध्यप्रदेश)
बालाघाट। बालाघाट जिला बौद्ध संघ के कार्याध्यक्ष भोजराज वासनिक ने संगठन की स्थापना दिवस के अवसर पर जिलेभर के बौद्ध उपासक-उपासिकाओं तथा बुद्ध-अम्बेडकर विचारधारा से जुड़े समाजजनों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि बालाघाट जिला बौद्ध संघ की स्थापना 3 अक्टूबर 1974 को जिले के प्रमुख समाजसेवियों द्वारा बुद्ध धम्म और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के मिशन को जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। संगठन ने लंबे समय तक जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर समाज में बुद्ध धम्म, सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक चेतना का विस्तार करने का कार्य किया।
भोजराज वासनिक ने कहा कि पांच दशक से अधिक समय की इस यात्रा में संगठन ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इसका मूल उद्देश्य समाज को संगठित करना और बुद्ध-अम्बेडकर विचारों को जन-जन तक पहुंचाना रहा है।
2012 से संगठन को लेकर विवाद का दौर
कार्याध्यक्ष भोजराज वासनिक के अनुसार वर्ष 2012 के आसपास संगठन के भीतर अलग-अलग समूहों के गठन और चुनाव को लेकर परिस्थितियां जटिल हुईं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों द्वारा अलग-अलग समूह बनाकर चुनाव में उम्मीदवार उतारे गए थे। इसी दौरान अधिवक्ता संजय खोबरागड़े वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे।
वासनिक के मुताबिक वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए तीन उम्मीदवार होने के बावजूद आपसी सहमति से विभिन्न पदों पर मनोनयन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने संजय खोबरागड़े के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन अंततः वे वरिष्ठ उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन अध्यक्ष जी.पी. हुमनेकर वर्ष 2012 से 2019 तक संगठन के अध्यक्ष रहे। इसी दौरान अधिवक्ता संजय खोबरागड़े को कटंगी और तिरोड़ी तहसील की जिम्मेदारी सौंपी गई। वासनिक के अनुसार दोनों तहसील अध्यक्षों के साथ मिलकर उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर कई कार्य किए।
24 मार्च 2019 को जिला अध्यक्ष का दायित्व
भोजराज वासनिक ने बताया कि 24 मार्च 2019 को तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे अधिवक्ता संजय खोबरागड़े को जिला अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। उनका आरोप है कि उस समय संगठन की जमा राशि और अन्य वित्तीय व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
उन्होंने दावा किया कि संगठन की गतिविधियों के दौरान सामाजिक-धार्मिक बैठकों के लिए राशि एकत्रित होती रही, लेकिन संस्था के पंजीयन और अन्य वैधानिक प्रक्रिया के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद अधिवक्ता संजय खोबरागड़े ने संस्था का ऑडिट करवाने की प्रक्रिया शुरू की तथा वर्ष 2012 से वर्ष 2026 तक संस्था के पंजीयन से संबंधित शुल्क जमा किए जाते रहे।
वासनिक ने कहा कि उन्होंने स्वयं रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी, जबलपुर कार्यालय जाकर संस्था से संबंधित दस्तावेजों और कार्यवाही की जानकारी ली है। उनके अनुसार संगठन के पंजीयन को लेकर वर्तमान स्थिति स्पष्ट है और संस्था का पंजीयन यथावत है।
संगठन के नाम पर अलग-अलग समितियां बनाने का आरोप
कार्याध्यक्ष भोजराज वासनिक ने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में कुछ लोगों ने सामाजिक एवं धार्मिक बैठकों के माध्यम से संगठन को प्रभावित करने का प्रयास किया और बाद में एक अस्थाई समिति बनाकर अलग संगठनात्मक गतिविधियां संचालित कीं।
उन्होंने दावा किया कि सात लोगों द्वारा एक ही संगठन के नाम से अलग व्यवस्था खड़ी करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाज ने उसे अपेक्षित समर्थन नहीं दिया। वासनिक के अनुसार इसके बाद संगठन में एकता बनाए रखने के उद्देश्य से दोनों पक्षों के बीच समझौते की पहल हुई।
उनके मुताबिक यह संदेश दिया गया कि यदि अधिवक्ता संजय खोबरागड़े अपने पद से त्यागपत्र देते हैं तो दूसरे पक्ष द्वारा भी अपने संगठन का विलय कर दिया जाएगा। वासनिक ने कहा कि सामाजिक और धार्मिक एकता को ध्यान में रखते हुए संजय खोबरागड़े ने तत्काल अपना त्यागपत्र उन्हें सौंप दिया।
19 जून 2026 को कार्यकारिणी भंग करने का दावा–
वासनिक ने बताया कि इसके बाद सचिन मेश्राम ने भी अपना त्यागपत्र सौंपते हुए संबंधित सम्पूर्ण कार्यकारिणी को भंग कर दिया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से समाज में एकता का सकारात्मक संदेश गया।
हालांकि, भोजराज वासनिक का आरोप है कि इसके बाद भी कुछ लोगों द्वारा संगठन के नाम पर अपनी गतिविधियां जारी रखने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि संगठन को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की कोशिश समाजहित में नहीं है।
उन्होंने समाजजनों से अपील करते हुए कहा कि पद, प्रतिष्ठा या कुछ मिनट के भाषण के लिए सामाजिक संगठन की एकता को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी संगठन की वास्तविक ताकत उसके पदाधिकारियों से अधिक समाज की एकजुटता में होती है।
समाज को बांटने वालों से रहें दूर
भोजराज वासनिक ने समाज के लोगों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखें जो संगठन में विभाजन पैदा करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या समूह के पास संस्था से संबंधित कोई दावा, दस्तावेज या आपत्ति है तो उसे निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से सामने रखना चाहिए, न कि समाज के बीच भ्रम या अलगाव की स्थिति पैदा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि “समाज को बांटने वालों से दूर रहना ही संगठन और समाज की एकता के हित में है।”
वासनिक ने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित लोग संगठन को कमजोर करने और उसके नाम को अपने हित में इस्तेमाल करने का प्रयास करते रहे हैं। उन्होंने समाज से ऐसे प्रयासों को महत्व नहीं देने तथा संगठन की मूल भावना को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।
1974 से 2026 तक की सामग्री उपलब्ध होने का दावा
कार्याध्यक्ष ने समाजजनों को अवगत कराया कि बालाघाट जिला बौद्ध संघ से संबंधित वर्ष 1974 से वर्ष 2026 तक की संगठनात्मक सामग्री और दस्तावेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि आगामी समय में संगठन का विधिवत चुनाव कराया जाएगा और नए अध्यक्ष का निर्वाचन होने के बाद उन्हें नियमानुसार कार्यभार सौंपा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2012 से वर्ष 2026 तक की जमा राशि, संस्था के ऑडिट तथा अन्य वित्तीय विवरण समाज के सामने रखे जाएंगे, ताकि संगठन से जुड़े आर्थिक मामलों में पारदर्शिता बनी रहे।
विधिवत चुनाव के बाद नई कार्यकारिणी
भोजराज वासनिक ने कहा कि बालाघाट जिला बौद्ध संघ किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि समाज की संस्था है। संगठन की गतिविधियां संविधान, नियम और वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार संचालित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आगामी समय में विधिवत चुनाव कराकर नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा।
उन्होंने समाजजनों से अपील की कि व्यक्तिगत मतभेदों को संगठन के हित से ऊपर न रखें और बुद्ध-अम्बेडकर विचारधारा के मूल संदेश—समानता, बंधुत्व, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय—को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करें।
स्थापना दिवस के अवसर पर उन्होंने जिले के सभी बौद्ध उपासक-उपासिकाओं, बुद्ध-अम्बेडकरवादियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पांच दशक से अधिक पुरानी संस्था की विरासत को विवादों के बजाय संगठनात्मक एकता और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
भोजराज वासनिक ने पुनः समाजजनों से आह्वान किया कि संगठन को तोड़ने, समाज में विभाजन पैदा करने और संस्था के नाम को व्यक्तिगत हितों से जोड़ने वाले किसी भी प्रयास से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि संगठन की एकता ही समाज की वास्तविक ताकत है….

