मूकनायक समाचार । सूरत
गुजरात सरकार द्वारा प्रस्तावित नए भाड़ा विधेयक (टेनेन्सी एक्ट) के खिलाफ राज्यभर के वकील मंडलों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। भाड़ा अनुबंध तथा मकान मालिक-किराएदार के बीच विवादों के निपटारे की अदालती शक्ति म्युनिसिपल कमिश्नर स्तर पर सौंपने के प्रावधान के खिलाफ गुजरात बार काउंसिल के नेतृत्व में राज्यभर की अदालतों में वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पहले प्रतीकात्मक हड़ताल और सरकार के समक्ष ज्ञापन देने के बाद भी कोई सुखद समाधान न आने से अब वकीलों ने कोर्ट की कार्यवाही से अलग रहकर आंदोलन और तेज कर दिया है।
वकील मंडलों का मुख्य आरोप है कि भाड़ा अनुबंध और किराएदार संबंधी विवादों के निराकरण के लिए सिविल कोर्ट की न्यायिक शक्ति छीनकर म्युनिसिपल कमिश्नर या सनदी अधिकारियों को सौंपना न्यायपालिका की स्वायत्तता पर प्रहार के समान है। अधिकारियों के पास अदालती केस चलाने का न्यायिक अनुभव न होने से आम नागरिकों को उचित न्याय मिलना मुश्किल हो जाएगा। इस कानूनी बदलाव को वापस लेने की मांग के साथ वकील मैदान में उतरे हैं।
आंदोलन को उग्र बनाने के लिए राज्यभर में वकीलों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। अहमदाबाद के ऐतिहासिक भद्र सिविल कोर्ट परिसर से वकीलों द्वारा विशाल बाइक रैली का आयोजन किया गया है, जो इनकमटैक्स चौराहे तक पहुंचेगी। इस रैली के बाद वकील मंडल का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और कानून मंत्री के समक्ष रूबरू पहुंचकर ज्ञापन सौंपेगा। वडोदरा वकील मंडल (बार एसोसिएशन) भी पूर्ण समर्थन के साथ हड़ताल में शामिल हो गया है। वडोदरा कोर्ट परिसर में वकीलों ने कामकाज का बहिष्कार कर नारेबाजी की।
वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते सबसे अधिक बुरी स्थिति निर्दोष मुवक्किलों और पक्षकारों की हुई है। राज्य के हाईकोर्ट से लेकर जिला और तालुका अदालतों में मामलों की सुनवाई बाधित हो गई है। दूर-दूर के गांवों और अन्य जिलों से अपना केस लड़ने या तारीख पर आने वाले पक्षकार कोर्ट परिसर के बाहर लाचार होकर बैठे रहने को मजबूर हैं। मुवक्किलों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा, “अगर कोर्ट में तारीख पर हाजिर न रहें तो कोर्ट से वारंट या समन निकलने का डर रहता है, और दूसरी तरफ वकीलों की हड़ताल होने से कोर्ट रूम में प्रवेश नहीं किया जा सकता।” इस गंभीर स्थिति के कारण पूरे राज्य में न्यायिक कार्य ठप हो गया है। बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार भाड़ा विधेयक में उचित सुधार का आश्वासन नहीं देगी, तब तक लड़ाई जारी रहेगी।

