मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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समाज का यह एक कड़वा सच है कि मतलबी लोग अक्सर ‘अच्छाई’ की परिभाषा अपने फायदे के हिसाब से बदलते हैं। उनके लिए अच्छा व्यक्ति वह नहीं है जो नैतिक हो, बल्कि वह है, जो उनके गलत कामों पर मौन रहे और विरोध ना करे । स्वार्थी और बेईमान मानसिकता के लोग हमेशा ऐसे इंसानों की तलाश में रहते हैं, जिन्हें वे आसानी से अपने नियंत्रण में रख सकें। जब कोई व्यक्ति उनके अन्याय, झूठ या धोखे को देखकर भी चुप रहता है, तो वे उसे ‘सज्जन’, ‘समझदार’ या ‘अच्छा’ कहकर उसकी तारीफ करते हैं। वास्तव में, यह प्रशंसा कोई सम्मान नहीं, बल्कि उनकी अपनी कमियों को छिपाने की एक ढाल होती है। वे चाहते हैं कि समाज उनकी गलतियों पर आंखें मूंद ले।
इसके विपरीत, जैसे ही कोई साहसी व्यक्ति उनके अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है या सही और गलत का अंतर स्पष्ट करता है, वही स्वार्थी लोग उसे तुरंत ‘बुरा’, ‘अहंकारी’ या ‘विवादित’ घोषित कर देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सच्चाई उनकी बेईमानी के साम्राज्य को हिला देती है। अंततः, हमें यह समझना होगा कि हर किसी की नजर में अच्छा बने रहने की चाह हमें रीढ़विहीन बना सकती है। बेईमानों की प्रशंसा पाने के लिए अन्याय को सहना कायरता है। एक सच्चे और मजबूत चरित्र वाले इंसान की पहचान यही है कि वह स्वार्थी तत्वों की नजर में ‘अच्छा’ बनने के बजाय, सच और न्याय के रास्ते पर अडिग रहे।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

