

मेधावी विद्यार्थियों को 25 हजार रुपये की सहायता सराहनीय, लेकिन शिक्षक, भवन और गैर-शैक्षणिक दायित्वों से जुड़ी समस्याओं के समाधान की भी जरूरत
संवाददाता : सत्यशील गोंडाने, बालाघाट
बालाघाट। कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की सहायता प्रदान करने की पहल सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 सितंबर को भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में राशि अंतरित की।


बालाघाट जिले में योजना के तहत 4,071 विद्यार्थी पात्र हैं। इनमें 1,520 बालक और 2,551 बालिकाएं शामिल हैं। विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए कुल 10 करोड़ 17 लाख 75 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इससे विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और उच्च शिक्षा की तैयारी में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
यह योजना सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की मेहनत को प्रोत्साहित करने वाली पहल है। वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए लैपटॉप विद्यार्थियों के लिए उपयोगी संसाधन साबित हो सकता है।

बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी
लैपटॉप जैसी प्रोत्साहन योजनाओं के साथ सरकारी स्कूलों की बुनियादी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता भी बनी हुई है। जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में भवनों की मरम्मत, अतिरिक्त कक्षों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिक जरूरत है।
इसी तरह कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है। कई स्थानों पर शिक्षकों को एक से अधिक कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। इससे सभी विद्यार्थियों को पर्याप्त समय देना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
गैर-शैक्षणिक दायित्वों से शिक्षण कार्य प्रभावित न हो
सरकारी शिक्षकों को शिक्षण कार्य के साथ विभिन्न प्रशासनिक और विभागीय जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। इनमें BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर जैसी निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियां भी शामिल हैं। निर्वाचन कार्य लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन जिन स्कूलों में पहले से शिक्षकों की कमी है, वहां अतिरिक्त दायित्वों के कारण शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए बेहतर समन्वय आवश्यक है।
शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता और उनके गैर-शैक्षणिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाकर विद्यार्थियों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है।
डिजिटल शिक्षा के साथ मजबूत हो आधारभूत ढांचा
शिक्षा का आधुनिक स्वरूप केवल डिजिटल संसाधनों तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए योग्य और पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित भवन, पर्याप्त कक्ष, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए लैपटॉप वितरण जैसी योजनाओं के साथ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने, जर्जर भवनों की मरम्मत करने और मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सराहना के साथ अपेक्षा भी
बालाघाट जिले के 4,071 विद्यार्थियों को मिली लैपटॉप सहायता उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन का सम्मान है। यह पहल विद्यार्थियों को तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ने और उच्च शिक्षा के नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करेगी।
वहीं, सरकारी स्कूलों की जमीनी चुनौतियों का समाधान इस पहल को और अधिक सार्थक बना सकता है। सरकार से अपेक्षा है कि मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ सामान्य विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करने पर निरंतर ध्यान दिया जाए, ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके और भविष्य में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की संख्या में और वृद्धि हो।

