मूकनायक/दुर्गेन्द्र सम्राट उप संपादक उत्तर प्रदेश सिद्धार्थनगर/उत्तर प्रदेश
इटवा में जनता सेवा हॉस्पिटल पर बड़ी कार्रवाई की आहट—मौके पर सील टूटी मिली, एसीएमओ डॉ. मानवेन्द्र पाल पुलिस टीम के साथ कर रहे जांच
सिद्धार्थनगर। इटवा कस्बे में आधी रात उस समय हड़कंप मच गया, जब स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम अचानक जनता सेवा हॉस्पिटल पहुंच गई अस्पताल पहले से सील था, लेकिन मौके पर पहुंची टीम को अस्पताल की सील टूटी हुई दिखाई दी, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि सील तोड़ने के बाद अस्पताल के अंदर आखिर क्या-क्या गतिविधियां संचालित हो रही थीं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
मौके पर स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ डॉ. मानवेन्द्र पाल पुलिस टीम के साथ मौजूद रहकर पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं टीम के सामने सील टूटी हुई पाए जाने के बाद अब यह जांच का अहम विषय बन गया है कि सील कब, किसने और किस उद्देश्य से तोड़ी
टूटी सील के बाद अंदर गतिविधियों की आशंका, ऑपरेशन होने की भी सूचना
सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, सील तोड़कर अस्पताल के अंदर कथित रूप से गतिविधियां संचालित किए जाने की बात सामने आ रही है
यह भी जानकारी मिल रही है कि एक दिन पहले अस्पताल के अंदर ऑपरेशन किया गया था हालांकि ऑपरेशन और अन्य गतिविधियों से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी
मौके पर सील टूटी मिलने और मरीजों की मौजूदगी की चर्चा ने सवालों को और गंभीर कर दिया है
यदि अस्पताल प्रशासनिक कार्रवाई के तहत सील था, तो उसके अंदर मरीज आखिर कैसे पहुंचे और कथित रूप से चिकित्सा संबंधी गतिविधियां किसकी अनुमति से संचालित हो रही थीं?
सूत्रों के अनुसार, एक होलसेल मेडिकल प्रतिष्ठान एम.ए. फार्म से कथित दवा आवागमन की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि यह पूरे मामले का केवल एक पहलू है। जांच का मुख्य केंद्र अब टूटी हुई सील और उसके बाद अस्पताल के अंदर हुई कथित गतिविधियां हैं
पुलिस ने कथित तौर पर राकेश यादव नाम के व्यक्ति को बैठाया मौके पर मौजूद सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने कथित तौर पर राकेश यादव नाम के एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए बैठाया
आरोप है कहता रहा है पुलिसकर्मियों के साथ कथित अभद्रता किए जाने की बात भी सामने आ रही है
अब अस्पताल में उसकी मौजूदगी और भूमिका की भी जांच की जा रही है
असली संचालक की जगह कथित दूसरे व्यक्ति की मौजूदगी पर सवाल
मामले में अस्पताल के वास्तविक संचालन को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं आखिर अस्पताल का वास्तविक संचालन किसके हाथ में था?
सील के बाद कौन लोग अंदर प्रवेश कर रहे थे?
कथित रूप से मरीजों का इलाज या ऑपरेशन किसके निर्देश पर किया जा रहा था?
पूर्व में भी कार्रवाई के दौरान अस्पताल के वास्तविक संचालक को लेकर विवाद सामने आया था उस दौरान राकेश यादव का नाम चर्चा में आया था और इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों में भी खबर प्रकाशित होने की बात सामने आई थी
अब सवाल यह भी है कि अस्पताल के संचालन और सील तोड़ने के पूरे मामले में राकेश यादव की भूमिका क्या है और उनके खिलाफ क्या मौजूद ठोस साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई होगी एवं अन्य अस्पताल से जुड़े लोग भी मौके पर सक्रिय पाए जाते हैं, तो उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है
जांच में अस्पताल के वास्तविक संचालक, लाइसेंस और अन्य दस्तावेज, सील तोड़ने वाले व्यक्ति, अस्पताल में मौजूद लोगों, मरीजों और कथित रूप से हुई चिकित्सा गतिविधियों से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है
पूर्व में सील, अब टूटी मिली—फिर हो सकती है बड़ी कार्रवाई
जनता सेवा हॉस्पिटल पर पूर्व में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सील लगाया गया था अब मौके पर सील टूटी हुई पाए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया है
यदि जांच में सील तोड़ने, प्रतिबंध के बावजूद अस्पताल संचालित करने, कथित रूप से ऑपरेशन करने या अन्य अनियमितताओं के साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ पुनः बड़ी कार्रवाई हो सकती है
फिलहाल एसीएमओ डॉ. मानवेन्द्र पाल और पुलिस टीम मौके पर मौजूद रहकर पूरी गतिविधियों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि सील किसने तोड़ी, कब तोड़ी, उसके बाद अस्पताल में क्या-क्या गतिविधियां हुईं और पूरे मामले के लिए कौन जिम्मेदार है
मौके पर टूटी मिली सील ने इटवा में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई को और गंभीर बना दिया है अब जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारों के खिलाफ होने वाली अगली कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है

