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42 वर्षों की शिक्षकीय साधना का गौरवपूर्ण समापन, राजेंद्र कठाने को भावभीनी विदाई

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मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने | बकोड़ी (रामपायली), बालाघाट

शासकीय हाई स्कूल बकोड़ी में मंगलवार को एक ऐसा भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक राजेंद्र नामदेव कठाने को 42 वर्षों की निष्कलंक एवं समर्पित शिक्षकीय सेवा पूर्ण करने पर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। विशेष बात यह रही कि उन्होंने 20 नवंबर 1984 को जिस विद्यालय से अपनी शिक्षकीय यात्रा प्रारंभ की थी, 30 जून 2026 को उसी विद्यालय से सेवानिवृत्त होकर एक दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत किया।

शासकीय हाई स्कूल बकोड़ी एवं शिक्षक सम्मान समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में श्री कठाने का शाल, श्रीफल, स्मृति-चिन्ह, पुष्पहार एवं विशेष सम्मान पत्र भेंट कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों, विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने उनके व्यक्तित्व एवं सेवाओं को याद करते हुए भावभीनी विदाई दी। कई अवसरों पर पूरा वातावरण भावुक हो उठा।

राजेंद्र कठाने का जन्म 1 जुलाई 1964 को बालाघाट जिले के ग्राम मोहगांव खुर्द में हुआ। प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने शिक्षक बनने का संकल्प लिया और वर्ष 1984 में शासकीय हाई स्कूल बकोड़ी में सहायक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं। पूरे सेवाकाल में उन्होंने कभी स्थानांतरण नहीं कराया तथा एक ही विद्यालय में रहकर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समयपालन, अनुशासन, सरलता, विनम्र व्यवहार तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षकों में शामिल करती है।

शिक्षण कार्य के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक एवं बौद्ध धम्म आधारित जनजागरण गतिविधियों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। वे दि बुद्धिस्ट सोसायटी की रामपायली शाखा के अध्यक्ष रहे। वर्ष 2008 से 2012 तक तहसील वारासिवनी के अध्यक्ष, वर्ष 2012 से 2020 तक जिला बालाघाट के अध्यक्ष तथा वर्ष 2020 से वर्तमान तक मध्यप्रदेश इकाई के प्रदेश सचिव के रूप में समाज सेवा एवं संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके अलावा जन शिक्षा केंद्र में मास्टर ट्रेनर के रूप में उन्होंने अनेक शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनकी उत्कृष्ट शिक्षकीय एवं सामाजिक सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुए हैं। 27 अप्रैल 2025 को यूनिवर्सिटी ऑफ टोलेसा, मेक्सिको द्वारा डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं 20 अक्टूबर 2025 को दि बुद्धिस्ट सोसायटी द्वारा केंद्रीय शिक्षक सम्मान प्रदान किया गया।

समारोह में प्रदान किया गया विशेष सम्मान पत्र भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें उनके शिक्षकीय जीवन, सामाजिक योगदान, संगठनात्मक नेतृत्व एवं उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया गया। उपस्थित अतिथियों ने इसे एक समर्पित शिक्षक के जीवन का प्रेरणादायी दस्तावेज बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य एस.आर. पटले ने की। मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम पंचायत बकोड़ी के सरपंच दिनेश डोहरे, ग्राम पिपरिया के सरपंच छबिलाल माहुले, शासकीय हाई स्कूल बकोड़ी के प्राचार्य अरविंद यादव, ललिंद्र बंसोड, देवीलाल बिसेन तथा जन शिक्षक लोकराम जैतवार उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रफुल्ल बंसोड, सुखचंद गौतम, राजेंद्र सैयाम, भेजनलाल परते, प्रमेश मार्शकोले, मुकेश बाघमारे, हेमंत अटराहे सहित संकुल के अनेक शिक्षक एवं शिक्षिकाएं समारोह में शामिल हुए।

इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी इंद्रकला कठाने, पुत्री चेतना गोंडाने तथा दामाद डॉ. अरुण कुमार गोंडाने भी उपस्थित रहे। परिवारजनों ने उनके संघर्ष, सादगी, अनुशासन और सेवा भावना से जुड़े संस्मरण साझा किए, जिससे समारोह का वातावरण भावुक हो गया।

कार्यक्रम में शिक्षक पुष्पराज लिल्हारे, भोलाराम मशखरे, के.के. अग्ने, डॉ. नियति संभलकर, विभूति सहारे, अनीता कुर्वे, श्याम सुलकिया, करुणा गजभिए, हमेश्वरी बिसेन सहित शाला परिवार के सभी शिक्षक, कर्मचारी, ग्रामीण एवं बड़ी संख्या में पूर्व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

मंच संचालन शिक्षक आशीष शेंडे ने प्रभावशाली ढंग से किया। उन्होंने राजेंद्र कठाने के व्यक्तित्व, कृतित्व और सेवायात्रा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उनके योगदान को शिक्षा जगत की अमूल्य धरोहर बताया। अंत में प्राचार्य अरविंद यादव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, ग्रामीणों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि एक शिक्षक शासकीय सेवा से भले ही सेवानिवृत्त हो जाए, लेकिन अपने विद्यार्थियों के ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व में वह सदैव जीवित रहता है। राजेंद्र नामदेव कठाने का 42 वर्षों का समर्पित शिक्षकीय जीवन शिक्षा, अनुशासन, सेवा और सामाजिक प्रतिबद्धता का ऐसा प्रेरक उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करता रहेगा।