Sunday, July 26, 2026
Homeराजस्थानडॉ भीमराव अंबेडकर बाबा साहेब और उनकी पत्रकारिता मूकनायक से आज तक...

डॉ भीमराव अंबेडकर बाबा साहेब और उनकी पत्रकारिता मूकनायक से आज तक जाने इतिहास

‍‍‍‍संकलन:
रामलाल यादव झडस
मूकनायक संपादक राजस्थान

‍डॉ. भीमराव आंबेडकर की पत्रकारिता: वह कलम जिसने मूक समाज को आवाज़ दी “यदि इतिहास में किसी एक कलम ने करोड़ों वंचित लोगों के आत्मसम्मान को शब्द दिए, तो वह कलम डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की थी।”साथियों,
भारत में अनेक समाचार-पत्र निकल रहे थे। राजनीति पर चर्चा हो रही थी, अंग्रेज़ों के विरुद्ध आंदोलन चल रहे थे। लेकिन एक बड़ा प्रश्न था—
क्या उस भारत में उन लोगों की भी आवाज़ थी जिन्हें मंदिरों में प्रवेश नहीं मिलता था?
क्या उन बच्चों की भी पीड़ा समाचारों में थी जिन्हें स्कूल में बराबरी नहीं मिलती थी?क्या उन मजदूरों, महिलाओं और वंचित समाज के अधिकारों की चर्चा मुख्यधारा में होती थी?
डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देखा कि करोड़ों लोग केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि विचारों की दुनिया में भी मौन हैं।
उन्होंने समझ लिया—”जिस समाज की अपनी कलम नहीं होती, उसका इतिहास भी दूसरे लिखते हैं और उसके अधिकार भी दूसरे तय करते हैं।”
यहीं से शुरू हुई एक ऐसी पत्रकारिता जिसने भारतीय लोकतंत्र की दिशा बदल दी।

मूकनायक (31 जनवरी 1920)
31 जनवरी 1920 को मुंबई से “मूकनायक” का प्रकाशन शुरू हुआ। इस प्रयास को प्रारंभिक आर्थिक सहयोग कोल्हापुर के प्रगतिशील शासक छत्रपति शाहू महाराज ने दिया। बाबासाहेब ने इसका नाम “मूकनायक” क्यों रखा?

क्योंकि सदियों से जिन लोगों की आवाज़ दबा दी गई थी, जिनकी पीड़ा समाज के बड़े मंचों तक नहीं पहुँचती थी, यह समाचार-पत्र उनकी आवाज़ बनने के लिए निकला।
यह केवल अखबार नहीं था। यह करोड़ों लोगों के आत्मसम्मान की घोषणा था।

मूकनायक के माध्यम से बाबासाहेब ने शिक्षा, समानता, सामाजिक न्याय, राजनीतिक अधिकार, महिलाओं की स्थिति, श्रमिकों की समस्याएँ और लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे विषयों पर निर्भीक लेख लिखे।
उन्होंने समाज से पूछा—
“यदि मनुष्य जन्म से समान है, तो अधिकारों में असमानता क्यों?”
बहिष्कृत भारत (1927)
1927 में महाड़ सत्याग्रह के दौर में बाबासाहेब ने “बहिष्कृत भारत” प्रारंभ किया।

यह समाचार-पत्र केवल घटनाएँ नहीं छापता था।
यह लोगों को उनके अधिकार समझाता था। यह कानून की भाषा को जनता की भाषा बनाता था।
यह बताता था कि अन्याय को नियति मानकर स्वीकार करना भी अन्याय को मजबूत करना है। जनता (1930)
1930 में बाबासाहेब ने “जनता” का प्रकाशन प्रारंभ किया। यह केवल एक वर्ग का पत्र नहीं था।

इसमें किसानों, मजदूरों, महिलाओं, उद्योग, शिक्षा, लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय राजनीति पर गंभीर विश्लेषण प्रकाशित होते थे।
बाबासाहेब का मानना था कि लोकतंत्र केवल मतदान से नहीं चलता, बल्कि जागरूक नागरिकों से चलता है।

प्रबुद्ध भारत (1956)

1956 में “जनता” का नाम बदलकर “प्रबुद्ध भारत” रखा गया।

इसका संदेश स्पष्ट था—भारत को केवल शिक्षित नहीं, बल्कि प्रबुद्ध, अर्थात विवेकशील, वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला और मानवता में विश्वास रखने वाला समाज बनना चाहिए।बाबासाहेब की पत्रकारिता क्यों अलग थी? उन्होंने अफवाह नहीं लिखी। उन्होंने घृणा नहीं फैलाई।उन्होंने तथ्य रखे।
उन्होंने इतिहास पढ़ा। उन्होंने कानून समझाया।
उन्होंने आँकड़ों के साथ तर्क दिया।

उन्होंने कहा कि समाज को भावनाओं से नहीं, ज्ञान से बदला जा सकता है।

यदि बाबासाहेब पत्रकारिता में नहीं आते तो क्या होता?

वंचित समाज की संगठित आवाज़ बनने में अधिक समय लग सकता था।

शिक्षा, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के प्रश्न राष्ट्रीय विमर्श में उतनी मजबूती से नहीं पहुँचते।

लाखों लोगों तक संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी का संदेश देर से पहुँचता।

सामाजिक समानता पर होने वाली बहस कमज़ोर पड़ सकती थी।

संविधान में समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व जैसे मूल्यों की जनचेतना विकसित करने में कठिनाई आती।

बाबासाहेब ने केवल समाचार-पत्र नहीं निकाले।
उन्होंने आत्मसम्मान की चेतना जगाई।

उन्होंने लोगों से कहा—”शिक्षा प्राप्त करो, संगठित रहो और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करो।”

आज के पत्रकारों के लिए बाबासाहेब का संदेश

यदि आज बाबासाहेब हमारे बीच होते, तो शायद वे कहते—

“पत्रकार की कलम किसी व्यक्ति की नहीं, सत्य की होनी चाहिए। पत्रकार का धर्म किसी दल की नहीं, जनता की सेवा है। बिना तथ्य के आरोप मत लगाओ, बिना प्रमाण के निष्कर्ष मत निकालो और बिना जनहित के पत्रकारिता मत करो।”
समापन
डॉ. भीमराव आंबेडकर ने पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मिशन बनाया।
उन्होंने मूक लोगों को आवाज़ दी।
वंचितों को आत्मविश्वास दिया।
लोकतंत्र को वैचारिक गहराई दी।

और भारत को यह संदेश दिया कि—मिल
“जिस समाज की कलम जाग जाती है, उस समाज को कोई भी लंबे समय तक दबाकर नहीं रख सकता।”

यही कारण है कि भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में डॉ. भीमराव आंबेडकर केवल एक संपादक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की पत्रकारिता के महान शिल्पकार के रूप में सदैव स्मरण किए जाएंगे।
(अब सबसे बड़ा सवाल )
हर घर में एक पत्रकार क्यों होना चाहिए?
साथियों,
आज मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ।

क्या हर घर में डॉक्टर होना चाहिए?
हाँ, क्योंकि वह स्वास्थ्य बचाता है।

क्या हर घर में शिक्षक होना चाहिए?
हाँ, क्योंकि वह ज्ञान देता है।

क्या हर घर में वकील होना चाहिए?
हाँ, क्योंकि वह कानून की जानकारी देता है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर घर में एक पत्रकार भी होना चाहिए?

मेरा उत्तर है—हाँ, अवश्य होना चाहिए।

क्योंकि एक जागरूक पत्रकार केवल समाचार नहीं लिखता, वह पूरे समाज की आँख, कान और अंतरात्मा बन जाता है।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने पत्रकारिता इसलिए शुरू नहीं की कि वे प्रसिद्ध हो जाएँ। उन्होंने पत्रकारिता इसलिए शुरू की क्योंकि वे जानते थे कि जिस समाज की अपनी आवाज़ नहीं होती, उसका दर्द भी दुनिया तक नहीं पहुँचता।

उन्होंने समझ लिया था कि यदि समाज पढ़ेगा नहीं, लिखेगा नहीं और अपनी बात स्वयं नहीं कहेगा, तो दूसरे लोग उसके बारे में निर्णय लेते रहेंगे।

इसीलिए उन्होंने मूकनायक निकाला—ताकि मूक समाज बोल सके।
सवाल कर सके
आज भी हर समाज, हर गाँव और हर बस्ती में एक ईमानदार पत्रकार होना चाहिए।
क्यों? क्योंकि वही बताएगा कि गाँव में स्कूल है या नहीं।
वही बताएगा कि अस्पताल में डॉक्टर हैं या नहीं।

वही बताएगा कि गरीब को उसका राशन मिला या नहीं।वही बताएगा कि सड़क बनी या केवल कागज़ों में बनी।
वही बताएगा कि पानी की टंकी बनी, लेकिन उसमें पानी आता भी है या नहीं।वही बताएगा कि छात्रवृत्ति समय पर मिली या नहीं। वही बताएगा कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकार वास्तव में लोगों तक पहुँच रहे हैं या नहीं।
यदि गाँव में पत्रकार नहीं होगा, तो गाँव की समस्या भी अक्सर गाँव तक ही सीमित रह जाएगी।
लेकिन जहाँ पत्रकार होगा, वहाँ जनता की आवाज़ प्रशासन तक पहुँचेगी।

जहाँ पत्रकार होगा, वहाँ अधिकारी जवाब देंगे।
जहाँ पत्रकार होगा, वहाँ भ्रष्टाचार करने वाले डरेंगे।
मनजहाँ पत्रकार होगा, वहाँ जनता जागरूक होगी।

जहाँ पत्रकार होगा, वहाँ लोकतंत्र मजबूत होगा।
पत्रकार समाज और सरकार के बीच एक जीवंत पुल है।

वह जनता की पीड़ा को शासन तक पहुँचाता है और शासन की योजनाओं की जानकारी जनता तक लाता है।

इसीलिए पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। लेकिन साथियों,पत्रकार होना केवल कैमरा उठाना नहीं है। पत्रकार होना केवल सोशल मीडिया पर वीडियो डालना नहीं है।एक पत्रकार होना एक नैतिक जिम्मेदारी है।
एक पत्रकार को सत्य बोलने का साहस चाहिए।

तथ्यों की जाँच करने का धैर्य चाहिए। गरीब, किसान, मजदूर, महिला, विद्यार्थी और वंचित समाज की पीड़ा को समझने की संवेदनशीलता चाहिए।

यदि समाज में सौ जागरूक पत्रकार होंगे, तो सैकड़ों समस्याएँ सामने आएँगी और उनके समाधान की संभावना भी बढ़ेगी।
इसीलिए मैं कहना चाहता हूँ—कि हर घर में यदि एक शिक्षित युवा है, तो उसे केवल नौकरी का नहीं, समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी विचार करना चाहिए।

यदि हर गाँव में एक ईमानदार पत्रकार होगा, तो वहाँ का विकास तेज़ होगा।

यदि हर समाज में एक निर्भीक पत्रकार होगा, तो अन्याय छिप नहीं सकेगा।

यदि हर जिले में निष्पक्ष पत्रकार होंगे, तो लोकतंत्र और मजबूत होगा।

और यदि पूरे भारत में सत्यनिष्ठ पत्रकारों की संख्या बढ़ेगी, तो हमारा लोकतंत्र और अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनहितकारी बनेगा।

यही डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की पत्रकारिता का सबसे बड़ा संदेश था—

“समाज को केवल पढ़ा-लिखा मत बनाओ, उसे जागरूक भी बनाओ। क्योंकि जागरूक समाज ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।”

आइए, हम संकल्प लें—

हर घर में शिक्षा होगी।
हर समाज में जागरूकता होगी।
हर गाँव में सत्य की आवाज़ होगी।
और हर पत्रकार अपनी कलम को जनहित, संविधान और मानव गरिमा के लिए समर्पित करेगा।

यही सच्ची पत्रकारिता है।
यही लोकतंत्र की आत्मा है।
और यही बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की पत्रकारिता की सबसे बड़ी प्रेरणा है। आज वही बाबा साहब की प्रथम 1920 की पत्रीका मूकनायक पवित्र नाम हमने पुनः प्राप्त किया है । इसकी पवित्रता को कायम रखने के लिए हम प्रतिबद्ध है ।आज भारत मे वंचीतो की सशक्त आवाज मूकनायक आधुनिक रूप मे प्रिन्ट एवं डिजीटल मीडिया रूप मे उपलब्ध है।
जो संपूर्ण भारत मे तेजी से विस्तारित हो रहा है । आपके पास मूकनायक जैसा राष्ट्रिय सशक्त मीडिया है ।
आप या अपने बच्चो को बनाए पत्रकार सबके लिए सुनहरा मौका है पत्रकार बनने का ।
आईए एवं जुड़े मूकनायक के साथ

एवं (मूकनायक को यथा शक्ति आर्थिक मदद / सहयोग भी करे । ये मीडिया आपका अपना राष्ट्रिय मीडिया है ।
इसका संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है ।
आपकी मदद से ही हमारी पत्रकारिता आबाद और निरंतर चलती रहेगी ) अतः सहयोग जरूर करे ।

याद रखे मूकनायक किसी  राजनितिक  कोरपोरेट या अन्य धन्ना सेठो से मदद नही लेता ।

इसलीए हमारी निर्भीक निडर और स्वतंत्र पत्रकारिता ही बाबा साहेब के मूकनायक पवित्र नाम की पहचान है ।

हम से संपर्क करे ।
राजस्थान हेतु संपर्क
-रामलाल यादव स्टेट संपादक राजस्थान

  • 8890304717 /8209466503
    संपूर्ण भारत हेतु संपर्क – मूकनायक राष्ट्रिय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
  • 9001101338
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments