मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग कभी भी सीधा और आसान नहीं होता। इस मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए जो दो तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं, वे हैं—गलतियों के भय से मुक्ति और शुरुआत करने के लिए पहला कदम उठाना। अधिकांश लोग जीवन में इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि वे शुरुआत करने से ही डरते हैं और सोचते हैं, ‘अगर मैं असफल हो गया तो लोग क्या कहेंगे?’ या ‘मुझसे कोई गलती हो गई तो क्या होगा?’—यह विचार ही व्यक्ति को मानसिक रूप से पंगु बना देता है। किसी भी लंबी यात्रा की शुरुआत हमेशा एक छोटे से पहले कदम से होती है। जब तक हम केवल योजनाएँ बनाते रहेंगे और कदम आगे नहीं बढ़ाएंगे, तब तक लक्ष्य तक पहुँचना असंभव है। पहला कदम उठाना इस बात का प्रतीक है कि आपमें अपने सपनों को पूरा करने का साहस और संकल्प है।
शुरुआत में परिस्थितियाँ हमेशा अनुकूल नहीं होतीं और ना ही रास्ता पूरी तरह साफ दिखाई देता है, लेकिन जैसे-जैसे हम कदम आगे बढ़ाते हैं, वैसे-वैसे रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं। गलतियाँ हमें सिखाती हैं कि कहाँ सुधार की आवश्यकता है। जो व्यक्ति गलतियों को एक शिक्षक के रूप में स्वीकार करता है, उसे सफल होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। यदि हम जीवन में वास्तव में कुछ सार्थक हासिल करना चाहते हैं, तो हमें अपने मन से असफल होने के डर को पूरी तरह निकाल फेंकना होगा। डर को पीछे छोड़िए, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखिए और आज ही अपने लक्ष्य की ओर पहला कदम उठाइए। याद रखिए, रुक जाना या डर कर बैठ जाना ही असली असफलता है, जबकि प्रयास करते रहना ही सफलता का असली आधार है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

