पंचशील बुद्ध विहार में मान्यवर कांशीराम साहब की जयंती गरिमामय वातावरण में संपन्न
बिलासपुर
आज पंचशील बुद्ध विहार में बहुजन आंदोलन के महान शिल्पी एवं दूरदर्शी सामाजिक-राजनीतिक चिंतक की जयंती अत्यंत गरिमामय और विचारपूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर बुद्ध विहार के उपासकों द्वारा सामूहिक चर्चा के माध्यम से मान्यवर कांशीराम साहब के जीवन, उनके संघर्षों तथा बहुजन समाज के उत्थान के लिए किए गए ऐतिहासिक कार्यों को स्मरण किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से बुद्ध वंदना के साथ हुई। वंदना के उपरांत विचार-चर्चा का क्रम प्रारंभ हुआ, जिसमें उपस्थित वक्ताओं ने मान्यवर साहब के व्यक्तित्व और कृतित्व के विविध आयामों पर प्रकाश डाला।
चर्चा का प्रारंभ आयु. योगेश मानवटकर जी द्वारा किया गया। उन्होंने अपने वक्तव्य में मान्यवर कांशीराम साहब के बिलासपुर आगमन, जांजगीर से उनके राजनीतिक अभियान की शुरुआत, तथा सामाजिक जागरण के उद्देश्य से स्थापित संगठनों— बामसेफ और डी.एस.-4—की ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इसके पश्चात आयु. वंदना भांगे ताई ने अपने वक्तव्य में मान्यवर साहब की उस ऐतिहासिक और मानवीय भावना से परिपूर्ण अंतिम इच्छा का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने जीवन के अंतिम चरण में बुद्ध धम्म को अपनाने की आकांक्षा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि प्रायः कांशीराम साहब को केवल एक राजनेता के रूप में सीमित कर दिया जाता है, जबकि उनकी अंतिम इच्छा और वैचारिक दृष्टि उनके गहरे मानवतावादी चिंतन और सामाजिक क्रांति के व्यापक दृष्टिकोण को उजागर करती है।
इसके बाद आयु. लोकेश पूजा बौद्ध ने एक प्रभावशाली पैरोडी गीत के माध्यम से मान्यवर साहब के संघर्षपूर्ण जीवन, उनके मिशन और बहुजन समाज के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित जनों ने अत्यंत सराहा।
पंचशील बुद्ध विहार के वरिष्ठ उपासक कमलेश लवहात्रै ने अपने विचार रखते हुए मान्यवर कांशीराम साहब के सामाजिक, राजनीतिक तथा वैचारिक योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से बिलासपुर और जांजगीर क्षेत्र में उनके राजनीतिक कारवां की शुरुआत और उसके पीछे किए गए अथक परिश्रम की चर्चा की।
कार्यक्रम के अंत में आयु. अनामिका ताई ने अपने विचार व्यक्त करते हुए वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला और बताया कि मान्यवर कांशीराम साहब ने अपने समय में ही “चमचों” से सावधान रहने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इस चेतावनी की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, क्योंकि समाज के भीतर ऐसे तत्वों की संख्या निरंतर बढ़ती दिखाई दे रही है।
इस प्रकार पंचशील बुद्ध विहार में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक जयंती समारोह भर नहीं रहा, बल्कि वह मान्यवर कांशीराम साहब के संघर्ष, विचार और बहुजन मुक्ति के मिशन को स्मरण करने तथा उसे आगे बढ़ाने का एक सार्थक अवसर सिद्ध हुआ।


