मूकनायक पत्रकार विलायती राम पंवार।हरियाणा/करनाल/इंद्री l
भारत में मनुवाद मानसिकता जो जाति व्यवस्था और सामाजिक असमानता से जुड़ी एक जटिल और करी जड़ों वाला मुद्दा है इसे पूरी तरह खत्म होने में समय और नियंत्रण प्रयासों की जरूरत है कुछ बिंदु इस संदर्भ में।
1 *शिक्षा और जागरूकता* – शिक्षा के प्रचार और सामाजिक जागरूकता से मनुवाद सच में कमी आई है खासकर युवा पीढ़ी में। लेकिन ग्रामीण और कुछ शहरों में अभी भी प्रबल है।
2 *कानूनी और सामाजिक सुधार* – संविधान द्वारा जातिगत भेदभाव पर रोक और आरक्षण जैसी नीतियों से समानता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं लेकिन सामाजिक स्वीकृति अभी भी चुनौती पूर्ण
3 *आर्थिक बदलाव* – आर्थिक बदलाव और शहरीकरण से जातिगत पहचान की कठोरता खत्म हो रही है लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुई ।
4 *सांस्कृतिक प्रभाव* – सिनेमा सोशल मीडिया और साहित्य जैसे मध्यम मनुवाद के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं जो बदलाव लाने में मददगार साबित हो रहे हैं ।
5 *चुनौतियां* – परंपरावादी सोच राजनीतिक दृष्टिकोण और कुछ समूह का प्रतिशोध इसे खत्म करने में बाधा बने हुए हैं।
*निष्कर्ष* – मनुवाद को पूरी तरह से खत्म करना संभव है लेकिन इसके लिए दीर्घकालिक सामाजिक आर्थिक और संस्कृत सुधरो की जरूरत है यह एक धीमी प्रक्रिया है जिसमें सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। क्या आप लोग इस विषय में किसी विशेष पहलू पर जानकारी चाहोगे।

