Thursday, February 26, 2026
HomeUncategorizedअनुसूचित जाति के प्रति नेताओं में गहरी नफरत के चलते अनदेखी?

अनुसूचित जाति के प्रति नेताओं में गहरी नफरत के चलते अनदेखी?

फारूखनगर ही नही हर क्षेत्र में विमल वर्मा को इंटरव्यूह देने से खौंफ खाते हैं नेता मंत्री या जातिवाद से भरे हुए हैं?

गुड़गांव, संवाददाता। नगर पालिका फारूखनगर में चेयरमैन पद के लिए होने वाले चुनाव प्रचार के दौरान अनुसूचित जाति वर्ग के लिए गहरी नफरत देखने को मिल रही है। बता दें कि नगर पालिका चेयरमैन पद के लिए फारूख नगर क्षेत्र में चुनाव प्रचार अभियान चलाया जा रहा है जिसमें अनेकों दावेदार क्षेत्र के मतदाताओं को रिझाने में जुटे देखे जा सकते हैं। चुनाव प्रचार में सैनी समाज, यादव और जाट सहित सामान्य श्रेणी के ब्राम्हण वर्ग के प्रत्यासी भीतर ही भीतर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों से नफरत से भरे हुए नजर आए। हैरानी की बात है कि कहने को तो हम खुद को 21वीं सदी के आधुनिक दौर के पढ़े लिखे लोग कहलाते हैं लेकिन आज भी जाति वर्ण व्यवस्था का कलंक ढोय चले आ रहे हैं! नगर पालिका चेयरमैन पद के लिए यहां सामान्य वर्ग की शीट पर चुनाव होने की घोषणा हुई है जिसके चलते सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग आदि के उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपनी ताल ठोक रहे हैं। इसी क्रम में अनुसूचित जाति के पूर्व पार्षद डॉ.अशोक कुमार ने भी चेयरमैन पद के लिए पिछले पांच साल से तैयारी कर रखी है। जिनके काम से स्थानीय लोगों को भारी संतोष है और उन्होंने ही अशोक को और बड़ी सेवा सौंपने के लिए चेयरमैन पद का दावेदार बना दिया। डॉ. अशोक के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में चेयरमैन पद का चुनाव जातिवाद की भेंट चढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सैनी समाज के कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं जिन्होंने अपने चुनाव कार्यालय खोले हुए हैं जहां पर उनके कुछ नुमाइंदे ऐसा कहते सुने गए हैं कि उन्हें अनुसूचित जाति के लोगों के वोट की कोई जरूरत नहीं है। जातिवाद से ग्रस्त गुर्गे यह कहते हैं कि सैनी क्या कम हैं जो ढेड़ को चेयरमैन बनाएंगे। बकौल डॉ. अशोक सैनी समाज के उम्मीदवारों के इन नुमाइंदों ने कानूनी रूप से प्रतिबंधित ढेड़ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि हमें ढेड़ों के वोट की कोई जरूरत नहीं है यह बेहद गलत बात है। सिर्फ सैनी सैनी के वोट से ही जीत जाएंगे। इस बात से आहत और सकते में आकर डॉ. अशोक ने नव वर्ष के उपलक्ष्य में सर्व समाज की आयोजित एक बैठक में अपने कार्यालय में मीडिया के समझ अपना आक्रोश व दुःख एवं चिंता प्रकट करते हुए कहा कि चुनाव लड़ना है तो ढंग से लड़ लो वर्ना अपने घर बैठ जाओ। उन्होंने कहा जब कोई भी चेयरमैन जीतता है तो उसे सर्व समाज की वोट मिलती है उसे सभी का काम निष्पक्ष होकर जाति धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर करना होता है तो वोट मांगने के लिए भी यही भाव अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह चुनाव कोई लड़ाई नही है सिर्फ सेवक चुनने का उत्सव है जिसमें हमें दुश्मन की तरह नही खिलाडियों की तरह चुनाव में उतरना चाहिए। डॉ. अशोक के संबोधन की वीडियो से केवल कुछ शब्द सोशल मीडिया पर कट पेस्ट करके वायरल हुए जिससे सैनी समाज के कई उम्मीदवार चुनावी फायदे के लिए गलत प्रचार प्रसार करके वोटरों को गुमराह करने का प्रयास करने लग गए। यह बात जैसे ही पूर्व पार्षद अशोक को पता चली तो उन्होंने मीडिया बुलाकर अपना स्पष्टीकरण भी दे दिया। डॉ. अशोक व अन्य उम्मीदवारों के बीच तो संभव है कि राजनीतिक द्वंद युद्ध चल रहा है तो यह बात स्थानीय लोगों पर माहौल के अनुसार असर डाल सकती है किंतु इस बात की सच्चाई जानने के लिए जब अनुसूचित जाति के वरिष्ठ पत्रकार ने धरातल पर उतार कर हकीकत की तह तक जाने का प्रयास किया तो उन्हें भी जातिगत मानसिकता के तहत शिकार होने का साक्षात अनुभव मिल गया। बता दें कि यादव समाज के पूर्व चेयरमैन पति ने भी उनका फोन अनुसूचित जाति का पत्रकार होने के कारण नही उठाया। सैनी समाज के उम्मीदवार ने भी फोन उठाया मगर बार बार झूठ बोलकर मिलने का समय ही नही दिया जबकि ओबीसी एवं सामान्य वर्ण के पत्रकारों को बुलाकर साक्षात्कार दिया गया। इसी क्रम में यादव समाज के अन्य उम्मीदवारों ने जातिगत मानसिकता के चलते अनुसूचित जाति के पत्रकार की जानबूझ कर अनदेखी की है। जाट बिरादरी जो की ओबीसी वर्ग यानि शूद्र वर्ण व्यवस्था में आती है उनके भी हालात यही है जिन्हे कई बार फोन किया लेकिन उन्होंने भी मिलने का समय नही दिया जबकि सामान्य वर्ण के पत्रकारों को बुला बुलाकर वे भी अपना साक्षात्कार व खबरें कवर कराते हैं। ऐसा भी नही है कि अनुसूचित जाति के सभी पत्रकारों के साथ ये जातिगत नफरत मानने वाले लोग ऐसा करते हैं बल्कि जो अनुसूचित जाति वर्ग का पत्रकार इनकी चापलूसी करे या इनकी झूठी शान में कसीदे पढ़ते हैं उन्हें यह लोग पैसा दारू व प्रलोभन देकर इस्तेमाल करते हैं। यह कटु सत्य नगर पालिका चुनाव में देखने और अनुभव करने को मिला है। खास बात यह है कि भाजपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने को आतुर उम्मीदवार जातिवादी मानसिकता से अधिक ग्रस्त नजर आ रहे हैं। चिंता की बात है कि जब छोटे से क्षेत्र फारूखनगर में जातिवाद का इतना जहर भरा हुआ है तो देश भर में जातिगत नफरत का आलम क्या होगा? चुनाव लोकतंत्र का एक महा उत्सव होता है जिसमें मतदाता प्रत्यासियों के भाग्य विधाता के रूप में होते हैं लेकिन भाग्य विधाता (मतदाता) को कैसे भ्रमित किया जाता है भला ये बात किससे छिपी हुई है। जनता तो लोकतंत्र में मालिक होती है और जनता के नौकर होते हैं सभी पार्षद, विधायक, मंत्री-संतरी, सांसद, मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री आदि फिर भी जनता को बेबसी और मंहगाई की मार झेलनी पड़ती है। इसका कारण मतदाता को मालुम होना चाहिए कि वोट अमूल्य है जो सही व्यक्ति को चुनने के लिए डाला जाएगा तो क्षेत्र व देश का विकास और खुशहाली को कायम रखेगा वर्ना गलत व्यक्ति को वोट दिया गया तो देश व क्षेत्र के हालात बद से बद्तर होते जाएंगे। मतदाताओं को किसी भी नेता किसी पार्टी के झांसे, प्रलोभन, जुमलेबाजी और नौटंकी में नही फंसना चाहिए। सभी मतदाताओं को अपना वोट देने से पहले अच्छी तरह से विचार जरूर करना चाहिए कि वोट आखिर किसे और क्यों देने जा रहे हैं क्या वह वास्तव में जन सेवा करने के लायक भी है या सिर्फ अपने पैसों व प्रभाव के बल पर चुनाव जीतने का प्रयास कर रहे हैं। क्षेत्र में बेबाक लेखनी और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए सुविख्यात वरिष्ठ पत्रकार विमल वर्मा से साक्षात्कार से क्यों घबराते हैं नेता और उम्मीदवार या फिर जातिवाद के कारण कर रहे हैं इगनौर?

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments