Thursday, February 26, 2026
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति के मतदाताओं बिना सभी राजनीतिक दलों की नैया मझधार में

मूकनायक

हरियाणा

ओमप्रकाश वर्मा

5 अक्टूबर को हरियाणा में आम चुनाव के लिए मतदान किया जाएगा· इस दौरान अनुसूचित जाति के वोट बैंक पर बीजेपी व कांग्रेस दाव पेच आजमा रही है.
दलित समाज को बीजेपी पहले ही आरक्षण वर्गीकरण पर दो टूक कर चुकी है. हरियाणा विधानसभा चुनाव में अनुसूचित मतदाताओं को रिझाने के लिए सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। राज्य में करीब 22 प्रतिशत अनुचित जाति मतदाता हैं जो चुनाव का रुख बदलने की ताकत रखते हैं। बता दें कि प्रदेश में 17 आरक्षित सीटें हैं। भाजपा कांग्रेस इनेलो-बसपा गठबंधन और जजपा-आसपा गठबंधन , आप ने भी आरक्षित सीटों पर अनुसूचित जाति के उम्मीदवार उतारे हैं। दूसरा बड़ा वोट बैंक जाट समाज का है हरियाणा के अंदर है जो मुख्य रूप से तीन खेमो में विभाजित है पहला कोंग्रेस दूसरा इनेलो व जेजेपी. आम आदमी पार्टी हरियाणा में विधानसभा का चुनाव बिना किसी गठबन्धन के अकेले लड़ रही है.अब नज़रे अनुसूचित जाति के लोगों पर टिकी हुई है. एक और कांग्रेस दावा कर रही है कि लोकसभा चुनाव के जैसे दलित +जाट एकता के गठजोड़ से बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएंगे. हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में दलित मतदाताओं ने अपनी ताकत का एहसास सभी राजनीतिक दलों को कराया है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 10 लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पांच सीटों पर सिमट गई, जबकि कांग्रेस ने पांच सीटों की बढ़त हासिल की है।दूसरी ओर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग से मुख्य मंत्री बना कर बीजेपी ओबीसी वोटरों को रिझाने में सफल दिख रही है . तीसरा बसपा – इनेलो गठबंधन दलित- जाट वोटर पर अपनी पकड़ के जरिए चुनावी मैदान में उतारा हुआ है।
इनेलो के साथ गठबंधन में शामिल बसपा अध्यक्ष मायावती ने राज्य में अब तक बड़ी रैलियां की हैं, जिनमें उन्होंने दलितों को किसी सूरत में नहीं बंटने का संदेश दिया है और अपने शुभचिंतकों की पहचान करने को कहा है। यही स्थिति जजपा के साथ गठबंधन में शामिल आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण की है, जो दलितों को कांग्रेस व भाजपा से सचेत करने का काम कर रहे हैं।
अब देखना ये है की क्या बड़े राजनीतिक दल अपना परचम लहराने में सफल हो पायेंगे या स्थानीय राजनीतिक दल वोटरों को लुभाने में सफल रहेंगे। पार्टियों से बागी उम्मीदवारों की संख्या भी अब की बार अधिक है जो सरकार बनाने में उपयोगी सिद्ध हो सकते है.

Pintu Singla
छात्र नेता, हरियाणा

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