मूकनायक समाचार । सूरत
प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान फ्लोप नजर आ रहा है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़ लगाने और उन्हें बढ़ाने की अपील हो रही है, ऐसे में सूरत में सार्वजनिक फुटपाथ पर लगाए गए बड़े पेड़ों के काटे जाने की शिकायतों ने नगर निगम के गार्डन विभाग के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाना वराछा-सीमाडा नाका के पास विशाल पीपल के पेड़ों समेत नौ बड़े पेड़ों का निकंदन निकाल दिया है इसकी शिकायत मनपा आयुक्त को की गई है। कहीं पेड़ों की डाल काटने के नाम पर पूरे पेड़ को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, तो कहीं पेड़ों को तने से ही काट दिए जाने के आरोप लग रहे हैं। सार्वजनिक फुटपाथ पर पेड़ काटने की मंजूरी किसने दी और अगर अवैध कटाई हुई है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई, ऐसे सवालों के बीच पूरे मामले की जांच कराकर बिल्डर समेत जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग उठी है।
पिछले काफी समय से सूरत नगर निगम के फुटपाथ और सड़कों पर बड़े हुए पेड़ों का निकंदन निकाले जाने की शिकायत हो रही है। इस शिकायत के बीच मोटा वराछा में एक-दो नहीं बल्कि नौ बड़े पेड़ काट दिए जाने की गंभीर चौंकाने वाली शिकायत सामने आई है। नाना वराछा-सीमाडा नाका के पास सार्वजनिक फुटपाथ पर उगे विशाल पीपल के पेड़ काट दिए जाने की शिकायत में बिल्डर और नगर निगम के गार्डन विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। पर्यावरण प्रेमी ने कमिश्नर से की गई शिकायत में मौके पर पेड़ काटे जाने के फोटोग्राफ और जीपीएस मैप के आधार पर जांच की मांग की है। शिकायत के अनुसार, नौ बड़े पेड़ों के अलावा साइनबोर्ड के पास का एक पेड़ भी काट दिए जाने की शिकायत है। पर्यावरण प्रेमी ने शिकायत में मांग की है कि अगर पेड़ अवैध रूप से काटे गए हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ पुलिस शिकायत समेत सख्त कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर, अगर पेड़ काटने की मंजूरी नगर निगम ने ही दी है तो किस कारण और किन नियमों के तहत मंजूरी दी गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए। सार्वजनिक फुटपाथ के पेड़ किसी के निजी हित के लिए हटाए गए हैं या नहीं, मंजूरी की शर्तों का पालन हुआ है या नहीं और गार्डन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके की जांच की थी या नहीं, ऐसे मुद्दों की जांच की मांग उठी है। पेड़ काटने की शिकायतें सिर्फ शिकायत तक सीमित न रहें, बल्कि मौके की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाने की मांग की जा रही है।

