मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इस संसार में मनुष्य का आगमन और प्रस्थान दोनों ही बिना किसी पूर्व-निर्धारित मुहूर्त के होते हैं। जब जन्म और मृत्यु पर किसी नक्षत्र या तिथि का वश नहीं है, तो जीवन के अन्य छोटे-मोटे कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त की तलाश करना केवल एक भ्रम मात्र है। जो व्यक्ति हर कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग और ग्रहों की चाल देखता रहता है, वह अक्सर समय की गति को पीछे छोड़ देता है। समय किसी के लिए नहीं रुकता। जिस सुनहरे अवसर की तलाश में व्यक्ति किसी ‘शुभ घड़ी’ का इंतजार करता है, वह अवसर किसी और कर्मशील इंसान के हाथों में चला जाता है। इतिहास गवाह है कि बड़े और सफल लोगों ने कभी मुहूर्त का इंतज़ार नहीं किया, बल्कि अपने दृढ़ संकल्प और परिश्रम से हर समय को शुभ बना दिया क्योंकि उनके लिए कर्म ही श्रेष्ठ मुहूर्त है ।
शुभ-अशुभ का विचार हमारे मन की स्थिति है। सच्चा मुहूर्त वही है, जब आपका मन संकल्पबद्ध हो और आपके भीतर कर्म करने का जज्बा हो। अत्यधिक भाग्यवादी होना व्यक्ति को निष्क्रिय बना देता है, जिससे उसकी अपनी कार्यक्षमता और प्रतिभा दबी रह जाती है। वास्तविकता यह है कि सबसे बड़ा मुहूर्त आपका स्वयं का उत्साह और कार्य करने का जोश है। जब मन में सच्चा संकल्प हो और हाथों में मेहनत का हुनर हो, तो हर पल शुभ होता है। इसलिए, भाग्य के भरोसे बैठकर बेहतरीन अवसर खोने से बेहतर है कि वर्तमान क्षण का सदुपयोग किया जाए और अपने कर्म से अपनी किस्मत को संवारा जाए।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

