करोडों का निर्माण मिट्टी वाली रेती व मजदूरों का जीवन जोखिम में डालकर हो रहा है, एजेन्सी की जांच करेगा विभाग?
मजदूरों की सुरक्षा भगवान भरोसे पर, मोडेल स्कूल या लापरवाही का निर्माण?, चिकदा में गुणवत्ता का नामोनिशान नहीं
मूकनायक समाचार । डेडियापाडा (नर्मदा), फूलसिंग वसावा
नर्मदा जिला के नवनिर्मित चिकदा तहसील के चिकदा गांव में 16,57,82,458.20 रुपयों की लागत से निर्माण हो रही मोडेल स्कूल के निर्माण के लिए गंभीर लापरवाही के सवाल खडे हुए है। इतनी बडी राशि से बन रहे निर्माण में गुणवत्ता से लेकर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने पर समग्र मामला चर्चा में आ गया है।
सूत्रो से प्राप्त जानकारी के मुताबिक चिकदा गांव में मोडेल स्कूल का निर्माण वेलजी रत्ना सोरठीया इन्फ्रा प्राईवेट लिमिटेड द्वारा दिनांक 1 अप्रैल,2026 से शुरू किया होने की जानकारी प्राप्त हुई है। जोकि निर्माण स्थल पर देखने पर कई बाबतों को लेकर कार्य की गुणवत्ता और सलामती के नियमों की पालने के सामने गंभीर सवाल उठे है।
निर्माण स्थल पर उपयोग में ले जा रही रेती और कपची मिट्टीवाली व गुणवत्ता के संदर्भ में आरोप सामने आए है। निर्माण में हलकी गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग हो रहा होने से आने वाले समय में ईमारत की मजबूती और टिकाउ के लिए गंभीर सवाल खडे हुए है। ऐसे में निर्माण सामग्री के नमूने को लेकर उनकी टेकनिकल जांच की जाए ऐसी मांग उठी है।
साथ ही सेन्टिंग के कार्य में भी गोबाचारी और लापरवाही देखने मिली होने के आरोप लगाए जा रहे है। निर्माण के सभी स्तर पर टेकनिकल स्तर का पालना हो रहा है या नहीं इसकी जिम्मेदारी विभाग द्वारा स्थल जांच और गुणवत्ता जांच करना जरूरी हो गया है।
इसमें देखा जाए तो सबसे अहम मुद्दा मजदूरों की सुरक्षा का देखने मिला है। निर्माण स्थल पर मजदूरों हेल्मेट, सेफ्टी शुज और हाथ मोजा जैसी जरूरी सुरक्षा सामग्री के बिना काम हो रहा होने का आरोप लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं कई मजदूरों ऊंचाई पर लटककर काम भी कर रहे ऐसा दावा भी हो रहा है। अगर इस स्थिति में अगर कोई मजदूरी नीचे गिर जाए या निर्माण का कोई हिस्सा, सरिया या अन्य सामग्री नीचे गिर पडे तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
यहां सवाल यह है कि मजदूरों की सलामती के लिए जिम्मेदार कौन? क्या निर्माण एजन्सी द्वारा जरूरी सेफ्टी साधन दिए गए है? क्या स्थल पर सुरक्षा के नियमों का निरंतर रूप से पालना की जा रही है? और क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी जांच की जा रही है?
निर्माण स्थल पर मजदूरों के बच्चों खेलकूद भी कर रहे होने का आरोप है। जबकि यही स्थल पर सेन्टिंग के वायर, किल, लोहे के सरिये समेत जोखमी सामान पडा होने का दावा किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में अगर कोई बच्चा या अन्य व्यक्ति अगर घायल हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी रहेगी? ऐसे गंभीर सवाल भी उठ रहे है।
मोडेल स्कूल केवल एक इमारत नहीं है किन्तु भविष्य में छात्रों की शिक्षा के लिए उपयोग में आने वाली सार्वजनिक मिल्कत है। ऐसे में 16.57 करोड से अधिक अंदाजित लागत से हो रहे निर्माण में गुणवत्ता व सलामती के स्तर के लिए कडी पालना होना जरूरी है।
स्थानिय स्तर पर अब ऐसा भी सवाल उठ रहा है कि अगर निर्माण स्थल पर आने वाली बाबत देखने मिल रही है जिससे संबंधित सरकारी विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान अब तक क्यों नहीं गया? क्या निर्माण का नियमित टेकनिकल जांच की जा रही है? उपयोग में ली जा रही रेती, सिमेन्ट व अन्य सामग्री की गुणवत्ता परीक्षण की जा रही है? मजूरों की सुरक्षा के लिए नियम की पालना हो या नहीं इसकी जांच कौन करेगा? आमजनता द्वारा स्थानिय चूने गए प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की मिली भगत से हल्की गुणवत्ता का काम हो रहा होने का आरोप लगाया जा रहा है। जोकि यह आरोपों की सत्तावार पुष्टि नहीं हुई है। समग्र मामले में सरकारी विभाग, अधिकारियों और निर्माण ऐजेन्सी का पक्ष भी काफी महत्व का रहेगा।
अब मूलतः सवाल यह है कि रुपये 16,57,82,458.20 की लागत से हो रही यह मोडेल स्कूल के निर्माण की गुणवत्ता का स्वतंत्र टेकनिकल जांच होगी या नहीं?
निर्माण कार्य के संदर्भ कई सवाल खडे हुए है जिसमें निर्माण में उपयोग हो रही रेती और कपची के नमूना लिया गया है? क्या सेन्टिंग और स्ट्रक्चर की जांच की जाएंगी? क्या मजूरों को जरूरी हेल्मेट, सेफ्टी सुज और हाथ मोजे समेत की सुरक्षा सुविधा प्रदान की जा रही है इसकी जांच होगी? और जो लापरवाही या गैररीति साबित हो इसके लिए जिम्मेदार ऐजेन्सी और अन्य जिम्मेदारो के सामने क्या कार्रवाई होगी?
सार्वजनिक राशि से हो रही यह स्कूल के निर्माण गुणवत्तायुक्त और सुरक्षित हो यही समग्र विस्तार के हित में है। जिससे जिला विभाग और संबंधित विभाग द्वारा समग्र मामले में तत्काल स्थल जांच कर हकीकत बाहर लाई जाएंगी और आरोप सच्चे साबित हो तो नियम के मुताबिक कडी कार्रवाई की जाए ऐसी मांग उठ रही है।
अब देखना यह है कि चिकदा मोडेल स्कूल के निर्माण के सामने उठे यह गंभीर सवालों पर जिला विभाग कौन सा कदम उठाता है? क्या निर्माण की गुणवत्ता जांच होगी या आरोपों केवल कागज पर रह जाएंगे?

