मूकनायक समाचार । सूरत
सूरत म्युनिसिपल कोर्पोरेशन के कर्मचारी की गर्भवती पत्नी की तबीबी उपचार के दौरान छूट देने के लिए 25 हजार रुपये रिश्वत की ट्रेप में लिप्त अपराधी सिक्योरिटी ओफिसर को आज एसीबी की जांच अधिकारी ने तीन दिन के रिमान्ड की मांग के साथ कोर्ट में पेश किया कोर्ट ने अपराधी को एक दिन के रिमान्ड पर लेने का हुक्म दिया है।
सूरत म्युनिसिपल कोर्पोरेशन के शिकायती कर्मचारी को अपनी पत्नी की देखभाल के लिए नौकरी में छुटछाट देने के लिए 25 हजार रिश्वत मामले में सूरत म्युनिसिपल कोर्पोरेशन के अपराधी सिक्योरिटी ओफिसर शैलेष मणीलाल पारेख ने ग्राम्य एसीबी की ट्रेप में पकडा गया। प्रति माह 84 हजार की आमदनी प्राप्त अपराधी शैलेष पारेख को एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7,13(1) तथा 13(2) के गुनाह में गिरफ्तार कर आज 3 दिन की रिमान्ड की मांग के साथ खास अदालत में पेश किया था। जिसकी सुनवाई के दौरान एपीपी अरविंद वसोया ने बताया कि अपराधी ने स्वीकार की 25 हजार की रिश्वत राशी में से अन्य किसी कर्मचारी अधिकारी को देने था या नहीं? अन्य कोई अपराधी इस घटना में शामिल है या नहीं? अपराधी ने खुद सुपरविजन के तहत अन्य कर्मचारियों को नौकरी में छुट देने, पंचिग करना, गैरमौजुदगी नहीं गिनने का, मेमो नहीं देने नाम पर रिश्वत राशि ली होने की संभावना की भी जांच करनी है। अपराधी शैलेष पारेख ने पहले शिकायती के पास से 4 हजार रुपये की मांग कर खुद के खाते में गुगल-पे कराकर ओके डन केश दिए आ गए भाई ऐसा गलत मैसेज किया था। शिकायती के अलावा अन्य कर्मचारी के पास ऐसी डिजिटल राशी ट्रान्सफर कराई है या नहीं? गुनाह की जांच करने अपराधी की विडियोग्राफी स्टेटमेन्ट के लिए प्रत्यक्ष उपस्थिति जरूरी है। जिसको कोर्ट ने मान्य रखकर अपराधी को एक दिन के पुलिस रिमान्ड पर सौंपने का आदेश दिया।

