Tuesday, October 20, 2026
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आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में 3 सितंबर को बालाघाट बंद का आह्वान

आदिवासी समाज ने स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और मामले की जांच की मांग रखी, आवश्यक सेवाओं को बंद से रखा बाहर

संवाददाता : सत्यशील गोंडाने, बालाघाट

बालाघाट। आदिवासी एवं बैगा अंचलों में बच्चों की मौत के मामले को लेकर आदिवासी समाज ने 3 सितंबर को बालाघाट बंद का आह्वान किया है। समाज की ओर से बच्चों की मौत के मामलों की जानकारी सामने लाने, स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।

मंगलवार शाम धरना स्थल पर आयोजित पत्रकार वार्ता में समाज के पदाधिकारियों ने 3 सितंबर को प्रस्तावित बंद, आमसभा और रैली की जानकारी दी। पदाधिकारियों के अनुसार जिले के विभिन्न आदिवासी क्षेत्रों में करीब 30 बच्चों की मौत हुई है। इन मामलों को लेकर समाज द्वारा शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर अपनी मांगें रखी जा रही हैं।

आवश्यक और आपातकालीन सेवाएं रहेंगी जारी

बंद के दौरान आम नागरिकों और मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए अस्पताल, एंबुलेंस, दवा दुकान और अन्य आवश्यक एवं आपातकालीन सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है। स्कूल, कॉलेज और रसोई गैस जैसी आवश्यक सेवाओं को भी बंद से मुक्त रखने की बात कही गई है।

वहीं बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, बस एवं अन्य परिवहन सेवाएं, सब्जी मंडी सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को बंद रखने का आह्वान किया गया है। समाज ने व्यापारियों, वाहन संचालकों और नागरिकों से शांतिपूर्ण तरीके से बंद में सहयोग करने की अपील की है।

स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग

आदिवासी समाज की ओर से दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की मांग की गई है। समाज का कहना है कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में समय पर उपचार, दवाइयां, जांच सुविधा तथा आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए।

इसके साथ ही बच्चों की मौत के मामलों के कारणों की जांच कराने तथा प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से उपलब्ध सहायता की समीक्षा करने की मांग भी रखी गई है।

आमसभा के बाद निकलेगी रैली

3 सितंबर को बंद के दौरान धरना स्थल पर आमसभा आयोजित की जाएगी। इसमें बच्चों की मौत से जुड़े मामलों, स्वास्थ्य सुविधाओं और समाज की मांगों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद आदिवासी समाज एवं विभिन्न संगठनों की ओर से रैली निकाली जाएगी।

प्रस्तावित रैली धरना स्थल से प्रारंभ होकर जय स्तंभ चौक, बिरसा मुंडा चौक, जिला अस्पताल, रानी अवंती बाई चौक, काली पुतली चौक, मेन मार्केट, हनुमान चौक, सर्किट हाउस रोड, अंबेडकर चौक, एलआईसी एवं विश्वेश्वरैया चौक होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचेगी।

कलेक्टर कार्यालय में सौंपा जाएगा ज्ञापन

रैली के बाद कलेक्टर कार्यालय में समाज की ओर से ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से बच्चों की मौत के मामलों की जांच, स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने सहित विभिन्न मांगें रखी जाएंगी।

समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है।

बंद के बाद भी जारी रहेगा धरना

समाज के अनुसार 3 सितंबर का बंद एक दिवसीय रहेगा। इसके बाद धरना-प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है। आगामी आंदोलन के संबंध में आगे की रणनीति परिस्थितियों और मांगों पर होने वाली कार्रवाई के आधार पर तय की जाएगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ध्यान आकर्षित करने की पहल

आदिवासी समाज द्वारा आयोजित बंद और आंदोलन के माध्यम से जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों की ओर ध्यान आकर्षित किया जा रहा है।

बच्चों की मौत से जुड़े मामलों में वास्तविक स्थिति और कारणों की जानकारी संबंधित स्तर पर होने वाली जांच एवं आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर तथ्यात्मक जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण है।

3 सितंबर को प्रस्तावित बंद, आमसभा, रैली और ज्ञापन के माध्यम से समाज अपनी मांगें शासन-प्रशासन के समक्ष रखेगा। इस दौरान आवश्यक एवं आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की अपील भी की गई है।

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