मूकनायक/इंद्रसेन गौतम सब जिला ब्यूरो चीफ बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। जनपद के सोनहा थाने में तैनात सिपाही शेषनाथ यादव को लेकर क्षेत्र में गंभीर आरोपों और चर्चाओं का बाजार गर्म है सूत्रों की मानें तो वह करीब दो वर्षों से एक ही थाने में तैनात हैं और हल्का नंबर चार में लंबे समय से जमे हुए हैं। सूत्रों का आरोप है कि कथित तौर पर मोटी रकम की वसूली उनका धंधा बन गया है और पैसा नहीं तो कोई काम नहीं जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। इतना ही नहीं, सूत्रों का दावा है कि सुलह-समझौते के मामलों में भी कथित तौर पर रकम लिए बिना मामला नहीं छोड़ा जाता
कहीं चाय की दुकानों पर तो कहीं चौराहों पर उनकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में वह लगातार सक्रिय रहते हैं और उनकी कार्यशैली को लेकर आम लोगों में चर्चाएं हैं अब एक और गंभीर आरोप सामने
आया है आरोप है कि बिना सक्षम अधिकारी के स्पष्ट आदेश के सिपाही थाने से आवेदन लेकर बाहर चले जाते हैं
सूत्रों के अनुसार, जिस एक आवेदन को लेकर जाने की बात सामने आई, वह कथित रूप से संज्ञेय अपराध से संबंधित था सवाल यह है कि आखिर ऐसे आवेदन को किसके आदेश पर थाने से बाहर ले जाया गया और उसकी जांच किस अधिकारी की निगरानी में की जा रही थी?
आम जनता ने जब कथित तौर पर पूछा कि बिना अधिकारी के आदेश के आवेदन कैसे लेकर चले गए, तो आरोप है कि शेषनाथ यादव का जवाब था—“क्यों बताऊं, मैंने अधिकारी को बता दिया है, आप कौन होते हैं पूछने वाले?”
लेकिन सवाल उठता है कि क्या आम नागरिक को शिकायत की कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का अधिकार नहीं है?
क्या आम जनता से इस प्रकार बात करना उचित है? नागरिकों की गरिमा, विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया और निष्पक्ष प्रशासन के सिद्धांतों के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 21 की भावना का भी सवाल उठ रहा है
साथ ही, उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक सेवाओं की जवाबदेही और समयबद्ध निस्तारण से जुड़े लोक सेवा गारंटी कानून की भावना पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं
दिन के समय थाने में दिवसा अधिकारी और रात्रि में रात्रि अधिकारी की व्यवस्था रहती है
ऐसे में सवाल है कि यदि किसी आवेदन, विशेषकर कथित संज्ञेय अपराध से जुड़े आवेदन, पर कार्रवाई करनी थी तो क्या संबंधित सक्षम अधिकारी को इसकी जानकारी और अनुमति थी? क्या किसी सिपाही को अपनी मर्जी से आवेदन लेकर जांच के लिए निकलने का अधिकार है? सूत्रों का दावा है कि बिना उचित आदेश के सिपाही स्वयं ऐसे मामले की जांच नहीं कर सकता, जिस पर पुलिस अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए
सूत्रों की मानें तो शेषनाथ यादव पुराने और ऐसे कामों में माहिर खिलाड़ी बताए जाते हैं आरोप है कि जब कोई आम नागरिक सवाल पूछता है तो कथित तौर पर इसी तरह के जवाब देकर उसे चुप कराने का प्रयास किया जाता है
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सवाल पूछने पर आम जनता को इस तरह जवाब मिलेगा तो कोई पीड़ित अपनी शिकायत और कार्रवाई के बारे में पूछने की हिम्मत आखिर कैसे करेगा?
अब पुलिस के उच्चाधिकारियों से मांग उठ रही है कि सिपाही की लंबे समय से एक ही थाने में तैनाती, कथित वसूली, सुलह-समझौते के मामलों में लगाए गए आरोप, चाय की दुकानों और चौराहों पर कथित गतिविधियां, तथा बिना स्पष्ट आदेश आवेदन लेकर थाने से बाहर जाने के आरोपों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
बड़ा सवाल—सोनहा थाने में आखिर किसके संरक्षण में चल रही है यह कथित मनमर्जी? या फिर जांच के बाद आरोपों की सच्चाई कुछ और सामने आएगी?
नोट: खबर में लगाए गए आरोप सूत्रों के आधार पर हैं इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है संबंधित सिपाही शेषनाथ यादव और पुलिस विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा

