मूकनायक/ इंद्रसेन गौतम सब जिला ब्यूरो चीफ बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। थाना गौर क्षेत्र में सड़क के बीच बने गड्ढे को लेकर आवाज उठाने वाले पत्रकार रमाकान्त पर दर्ज मुकदमे को लेकर ग्रामीणों और पत्रकार के परिजनों ने सवाल खड़े किए हैं।
उनका आरोप है कि घटना को लेकर मौके पर मौजूद लोगों से निष्पक्ष जानकारी लिए बिना ही मामले को मारपीट का रूप दे दिया गया।
परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि विवाद की शुरुआत सड़क के बीच बने गड्ढे को लेकर हुई थी। पत्रकार द्वारा जनसमस्या उठाए जाने के बाद एक महिला से कहासुनी हुई।
आरोप है कि महिला द्वारा पत्रकार के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, लेकिन बाद में मामले को मारपीट की घटना के रूप में प्रस्तुत करते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
ग्रामीणों का दावा है कि कथित पीड़िता के शरीर पर चोट के स्पष्ट निशान दिखाई नहीं देते।
ऐसे में उनका सवाल है कि यदि मारपीट का आरोप लगाया गया है तो मेडिकल परीक्षण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविकता स्पष्ट क्यों नहीं की गई ग्रामीणों ने पुलिस
अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पत्रकार के परिवार का आरोप है कि थाना प्रभारी अतुल अंजान द्वारा मामले में एकतरफा कार्रवाई की जा रही है और पत्रकार को लगातार मुकदमों में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
परिजनों का यह भी आरोप है कि मामले के पीछे स्थानीय विवाद और दूसरे प्रकरण में पैरवी को लेकर उत्पन्न विवाद हो सकता है।
उनका कहना है कि जिस युवक के पक्ष में पैरवी किए जाने की बात कही जा रही है, उसे लेकर भी पहले छेड़खानी का आरोप लगाया गया था।
परिवार का आरोप है कि इसी विवाद की प्रतिक्रिया में पत्रकार को मुकदमे में नामजद कराया गया।
ग्रामीणों ने पुलिस उपमहानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक बस्ती से मांग की है कि मुकदमे की निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए तथा मौके पर मौजूद लोगों के बयान,
मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज अथवा वीडियो साक्ष्य और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की जांच की जाए।
परिजनों का कहना है कि यदि पत्रकार दोषी है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में गलत पाए जाते हैं तो निर्दोष व्यक्ति और उसके परिवार को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से राहत मिलनी चाहिए।
इस पूरे मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

