Home दिल्ली पहले निर्यात मंच से भारत–माली व्यापारिक रिश्तों को मिली नई गति

पहले निर्यात मंच से भारत–माली व्यापारिक रिश्तों को मिली नई गति

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पहले निर्यात मंच से भारत–माली व्यापारिक रिश्तों को मिली नई गति

भारत और पश्चिम अफ्रीका के देश माली ने द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पहली बार भारत–माली निर्यात संवर्धन मंच (India–Mali Forum for Promotion of Exports) का आयोजन किया। बमाको में आयोजित दो दिवसीय इस मंच ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को संस्थागत आधार देने के साथ-साथ निवेश, औद्योगिक सहयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
‘रीइनफोर्सिंग ट्रेड एंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स’ विषय पर आयोजित इस मंच की अध्यक्षता माली की संक्रमणकालीन सरकार के प्रधानमंत्री मेजर जनरल अब्दुलाये माइगा ने की। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय, बमाको स्थित भारतीय दूतावास तथा माली की निर्यात संवर्धन एजेंसी (APEX-Mali) ने किया। भारत की ओर से वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव (एफटी-अफ्रीका) अमित कुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया, जबकि भारत के राजदूत डॉ. एन. नंदकुमार पूरे आयोजन के दौरान मौजूद रहे। मंच में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा लगभग 30 भारतीय उद्योगपतियों ने भी हिस्सा लिया।
भारत और माली के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 326.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत अधिक है। माली से भारत मुख्य रूप से कच्चा कपास, तैयार चमड़ा, काजू, गोंद अरबिक, तिल और सीसा आयात करता है, जबकि भारत से माली को दवाइयां, सूती वस्त्र, दोपहिया एवं तिपहिया वाहन तथा साइकिलों का निर्यात किया जाता है। भारत की ड्यूटी-फ्री टैरिफ प्रेफरेंस योजना ने इस व्यापार वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
फोरम के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र उद्योग, ऑटोमोबाइल निर्माण, खनन तथा अन्य संभावित क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। बिजनेस-टू-बिजनेस,बिजनेस-टू-गवर्नमेंट, और गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट बैठकों में निवेश, व्यावसायिक साझेदारी और संभावित समझौता ज्ञापनों पर विस्तृत चर्चा हुई।
दोनों देशों ने कपास एवं वस्त्र, खनन एवं ऊर्जा, कृषि आधारित उद्योग, शीया प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स तथा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को भविष्य के सहयोग के लिए प्राथमिकता देने पर सहमति व्यक्त की। माली ने भारत से अपने Certificate of Origin प्रणाली के डिजिटलीकरण में सहयोग तथा भारतीय दवा उत्पादों के शीघ्र पंजीकरण में सहायता का अनुरोध किया। वहीं भारत ने शीया नट के निर्यात प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने और माली में भारतीय नागरिकों एवं निवेशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मंच के दौरान माली की निर्यात संवर्धन एजेंसी APEX-Mali ने भारतीय निवेशकों के समक्ष कई “Ready-Made Business Plans” प्रस्तुत किए, जिनका उद्देश्य निवेश प्रस्तावों को शीघ्र व्यावसायिक परियोजनाओं में बदलना है। फोरम के समापन पर माली ने घोषणा की कि 3 और 4 दिसंबर 2026 को एक विशेष निवेश सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए नई परियोजनियां प्रस्तुत की जाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और माली के बीच बढ़ता व्यापार दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में नई संभावनाओं का संकेत है। संसाधन-संपन्न पश्चिम अफ्रीकी देश माली के साथ व्यापार और निवेश सहयोग बढ़ने से भारतीय उद्योगों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं, वहीं माली को भी भारतीय तकनीक, निवेश और औद्योगिक विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। पहला भारत–माली निर्यात संवर्धन मंच इसी दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

लेखक:अरविंद कुमार कर्ण
नई दिल्ली