दुर्ग डॉक्टर अंबेडकर वाचनालय जवाहर नगर दुर्ग में माता रमाई की जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई इस अवसर पर सर्वप्रथम शाक्यमुनि तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमा एवं माता रमाई तथा बाबासाहेब आंबेडकर के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित एवं माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया तत्पश्चात उपस्थित बौद्ध उपासक एवं उपासिकों द्वारा त्रिशरण पंचशील एवं बुद्ध वंदना का सामूहिक पाठ किया गया । समारोह में उपस्थित महिला सशक्तिकरण की प्रदेश अध्यक्ष आयुष्मति प्रज्ञा बौद्ध के द्वारा माता रमाई का डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के प्रति त्याग और समर्पण एवं बलिदान को याद किया गया उन्होंने बताया कि भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न बोधिसत्व बाबासाहेब आंबेडकर बनाने में और उनको कामयाब बनाने में बहुत बड़ा योगदान रहा। भारतीय बौद्ध महासभा के ट्रस्टी यह एस आर कानडे बौद्ध ने भी अपने उद्बोधन में बताया की माता रमाई अंबेडकर की गुलाम भारत देश में उससमयकीपरिस्थितियों में बहुत कष्ट दुख झेल कर बाबा साहब के साथ 26 , 27 साल ही
अपना गृहस्थ जीवन बीताई। बहुत कम उम्र में ही बाबा साहब का साथ छोड़ चली गई बाबा साहब इससे बहुत आहत हुए। फिर भी बाबा साहब ने अपना धैर्य नहीं खोया और देश सेवा में लगे रहे। माननीय संजय शेन्दरे साहब ने माता रमाई के बारे में अपना विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर माननीय सी,एल माहेश्वरी केंद्रीय संगठक, एस एल देवदास बेनी लाल गोडबोले जितेंद्र मेश्राम सीके डोंगरे , बी, आर कठाने रामा रावढोक, प्रज्ञा बौद्ध, नीतू रामटेके लुंबिनी गजभिए अलका मेश्राम आशा मडामे कुर्रे मैडम उपस्थित रहे।
भारतीय बौद्ध महासभा के द्वारा इस साल का जयभीम कैलेंडर का वितरण किया गया। जिला अध्यक्ष सीके डोंगरे के द्वारा
आभार प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का संचालन यस यल देवदास के द्वारा किया गया अंत में मिष्ठान वितरण कर सभा विसर्जित की गई।
इस अवसर पर इन्दू ढोक सुषमा चौरे भी विशेष रूप से उपस्थित रही

