सर्वप्रथम डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के जन्मदिवस के अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई। इस पावन अवसर पर डॉ भीमराव अंबेडकर जी को शत् शत् नमन।
भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के विचार और कार्य आज भी भारतीय समाज की दिशा तय कर रहे हैं। उन्होंने जो संविधान दिया, उसने देश को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का मजबूत आधार प्रदान किया। आज हर नागरिक को जो मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, वे उनकी दूरदर्शी सोच का परिणाम हैं।
अंबेडकर जी ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करते हुए समान अवसर और सामाजिक न्याय की नींव रखी। वर्तमान समय में आरक्षण नीति, शिक्षा का प्रसार और पिछड़े वर्गों का सशक्तिकरण उनके प्रयासों का ही प्रभाव है।
उनका मूलमंत्र “शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो” आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है। शिक्षा के माध्यम से समाज में जागरूकता और आत्मनिर्भरता बढ़ रही है, जो उनके विचारों की प्रासंगिकता को दर्शाता है।
महिला सशक्तिकरण, श्रमिक अधिकार और मानवाधिकारों के क्षेत्र में भी उनके योगदान ने आधुनिक भारत को एक नई दिशा दी है।
अंततः, “पे बैक टू सोसाइटी” का उनका संदेश आज के समय में और भी महत्वपूर्ण है, जो हमें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करता है।
हमारे मार्गदर्शक भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का जीवन एक आंदोलन है—एक ऐसी प्रेरणा, जो समाज को शिक्षित, संगठित और संघर्षशील बनने की दिशा दिखाती है।
“शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो” आज भी संगठन के प्रत्येक प्रयास की आत्मा है।
डॉ. अंबेडकर जी ने किसी जाति विशेष के नहीं बल्कि पूरे समाज के हितों के लिए कार्य किया है क्योंकि महापुरुष किसी जाति विशेष के नहीं बल्कि पूरे समाज के होते हैं। नारी सशक्तिकरण, व संविधान निर्माण में डॉ अम्बेडकर जी की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही है।
निष्कर्षतः डॉ. अंबेडकर जी के विचार केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक हैं।
प्रोफेसर राजेश कुमार सोलंकी
राजकीय महिला महाविद्यालय
दादूपुर रोड़ान, करनाल
M.9467970463

