पंचशील बुद्ध विहार टिकरापारा में
महात्मा ज्योतिबा फूले एवं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती समारोह
बिलासपुर
बिलासपुर जिले में पहली बार राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फूले की जयंती पंचशील बौद्ध विहार टिकरापारा के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। जिसमें बहुजन चेतना को जागृत करने समतावादी सोच को बढ़ावा देने की ओर सार्थक कदम उठाए जाने के लिए वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
बहुजन समाज की वैचारिक चेतना को नई ऊर्जा देने हेतु महात्मा ज्योतिबा फूले एवं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती समारोह 2026 का भव्य आयोजन पंचशील बुद्ध विहार टिकरापारा परिवार द्वारा किया जा रहा है। यह आयोजन महात्मा ज्योतिबा फूले और डॉ. भीमराव आंबेडकर के महान विचारों, संघर्षों और उनके सामाजिक योगदान को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त प्रयास है।
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) स्थित पंचशील बुद्ध विहार, टिकरापारा में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, समानता और संवैधानिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का एक प्रेरणादायक मंच है। आयोजन समिति के अनुसार, यह समारोह समाज के सभी वर्गों को जोड़ते हुए नई पीढ़ी को महापुरुषों के विचारों से परिचित कराने का माध्यम बनेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत 11 अप्रैल 2026 से होगी, जिसमें शाम 4 बजे से ड्राइंग प्रतियोगिता, 5 बजे से निबंध प्रतियोगिता तथा शाम 6 बजे से सांस्कृतिक एवं वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन प्रतियोगिताओं के विषय महात्मा फूले और बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन और उनके विचारों पर आधारित होंगे, जिससे प्रतिभागियों में रचनात्मकता के साथ-साथ सामाजिक समझ भी विकसित हो सके।
वहीं, 14 अप्रैल 2026 को प्रातः 9 बजे सामूहिक वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इसके पश्चात रंगोली प्रतियोगिता एवं बाबासाहेब के कार्यों और संदेशों पर गहन वैचारिक चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें समाज के प्रबुद्धजन अपने विचार साझा करेंगे।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में रायपुर के प्रसिद्ध आंबेडकरवादी विचारक एवं साहित्यकार डॉ. संजीव खुदशाह उपस्थित रहेंगे, जो अपने विचारों से कार्यक्रम को नई दिशा प्रदान करेंगे।
आयोजकों ने सभी समाज बंधुओं, युवाओं, विद्यार्थियों एवं महिलाओं से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस आयोजन को सफल बनाएं। उनका कहना है कि “आपकी उपस्थिति ही इस आयोजन की वास्तविक शक्ति है।”
यह समारोह न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, समानता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक पहल है।


