छत्तीसगढ़ में देहदान की एक ऐतिहासिक अनुकरणीय पहल
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
बिलासपुर छत्तीसगढ़
दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ की संस्थापिका सविता बौद्ध “संकल्पी” की काउंसलिंग द्वारा “हम जीते जी तो सबके काम आते ही है ,कितना अच्छा होगा अगर मरने के बाद भी हमारा पार्थिव शरीर भी (मेडिकल के विद्यार्थीयों के) अध्ययन के काम आ जाए और हमारे नयन किसी के आंखों को रोशनी देकर उनके जीवन में उजियारा भर दें,अपनी इस सोच को मूर्त रूप का अवसर मुझे मिला । 15 जनवरी 2026 को दानों में धम्म दान सर्वोत्तम दान के साथ ही देहदान, अंगदान – महादान का संकल्प चरितार्थ करते हुए दुर्ग जिला अस्पताल में पहली बार बौद्ध समाज ने एक साथ इतनी अधिक संख्या में एकसाथ 25 लोगों ने जिसमें 18महिलाएं,1 युवा लड़की और 6 पुरुषों ने मरणोपरांत देहदान की ऐतिहासिक घोषणा की है। इस सु अवसर पर नवदृष्टि फाउंडेशन दुर्ग भिलाई की टीम और जिला अस्पताल के डॉक्टर्स की टीम की उपस्थित रही। सभी देहदानी साधुवाद के पात्र है जिन्होंने देहदान और नेत्रदान करके अपने जन्म को सार्थक किया है। मेरा मानना है,बौद्ध समाज सदैव नवाचार करने और मानव हित के कार्यों में अग्रणी रहा है और रहेगा । इस प्रकार के पुनीत कार्यों से मानव समाज में व्याप्त अनेक सड़ी गली कुप्रथाओं, कुपरंपराओ ,अंधविश्वास और अंधश्रद्धा का खात्मा किया जा सकता है।
धम्मदान सर्वोत्तम दान
देहदान, अंगदान महादान
मैंने किया है,
क्या आप भी करने को तैयार है?
मरने के बाद सबको,
राख के ढेर में बदल जाना है।
मैंने राख में बदलना अस्वीकार किया है,
क्या आपको भी राख में बदलना अस्वीकार है?
तो फिर आइए !!! एक संकल्प मैंने किया,
एक संकल्प आप कीजिए ….
लोगों को देहदान अंगदान के लिए
जागरूक कीजिए ।


