Thursday, February 26, 2026
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बालको में नववर्ष की शुरुआत सेवा कार्य से, जरूरतमंदों को भोजन व कंबल वितरण

कोरबा जिले के बालको नगर में सिद्धार्थ लोककल्याण समिति एवं मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में 1 जनवरी 2026 को नववर्ष उत्सव एवं भारत के संविधान का शौर्य दिवस गरिमामय रूप से मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन मूलनिवासी कार्यालय प्रांगण में किया गया, जहां नववर्ष की शुरुआत दिन-दुखियों की सेवा के संकल्प के साथ भोजन एवं कंबल वितरण कर की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन के छोटे भाई, लोकप्रिय पार्षद एवं समाजसेवक नरेंद्र देवांगन रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिद्धार्थ लोककल्याण समिति एवं मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष गोपाल ऋषिकर भारती ने की।
विशेष अतिथियों में बालको नगर के पार्षद सतेंद्र दुबे, जमनीपाली के पार्षद एवं जिला खनिज न्यास सलाहकार समिति सदस्य मुकुंद सिंह कंवर, कोहड़िया क्षेत्र संयोजक पुरानचंद पटेल, केंद्रीय प्रतिनिधि निरंजन प्रधान, जिला संयोजक एम-3 क्रांति कुमार साव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, महिलाएं एवं समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुनील सुना ने किया।

मुख्य अतिथि नरेंद्र देवांगन ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बुजुर्गों और जरूरतमंदों की सेवा ही सच्चा धर्म है। उन्होंने कंबल वितरण कर नववर्ष की शुरुआत की और कहा कि सिद्धार्थ लोककल्याण समिति के अध्यक्ष गोपाल ऋषिकर भारती लगातार गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्ग के बीच सामाजिक कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने मंत्री लखन लाल देवांगन के जनसेवा आधारित कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे बिना भेदभाव के क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हैं।

विशेष अतिथि सतेंद्र दुबे ने कार्यक्रम को नववर्ष और संविधान शौर्य दिवस के अवसर पर प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि महिलाओं एवं आमजन की बड़ी भागीदारी जनसेवा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। वहीं मुकुंद सिंह कंवर ने कहा कि कोरबा जिले के विकास के लिए शासन स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में गोपाल ऋषिकर भारती ने कहा कि नववर्ष को केवल उत्सव नहीं, बल्कि जनजागृति और समाजसेवा के नए अवसर के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने जातिभेद, लिंगभेद और छुआछूत के खिलाफ संघर्ष करने वाले महापुरुषों के योगदान को याद करते हुए वर्ष 2026 को भारत के संविधान का शौर्य वर्ष घोषित करने की घोषणा की। उन्होंने संविधान के आदर्शों और मानवीय मूल्यों पर चलकर समतामूलक समाज निर्माण का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान सभी जरूरतमंदों को भोजन एवं कंबलों का वितरण किया गया। अंत में आयोजकों द्वारा अतिथियों और उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं दी गईं।

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