Thursday, February 26, 2026
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“सामाजिक–आर्थिक समता स्थापित करना ही बाबा साहब को सच्ची श्रद्धांजलि” — संविधान चौक दुर्ग में मनाई गई डॉ. भीमराव अंबेडकर की 69वीं पुण्यतिथि

देश में फैली सामाजिक और आर्थिक विषमता को दूर करना ही बाबा साहब अंबेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

दुर्ग( छत्तीसगढ़)/मूकनायक

दुर्ग । दी बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया जिला शाखा एवं महिला सशक्तिकरण संघ के संयुक्त तत्वावधान में भारत रत्न बोधिसत्व डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी का 69 वां पुण्यतिथि बड़े सादगीपूर्ण ढंग से संविधान चौक में मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय ट्रस्टी एस.आर. कनाडे, आयुष्मान संजय सेंद्रे, आयुष्मति प्रज्ञा बौद्ध ने तथागत भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित एवं संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब की छायाचित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया। तत्पश्चात उपस्थित बौद्ध उपासक एवं उपासिकाओं के द्वारा बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील का सामूहिक गायन किया गया। उसके बाद नूतन पाखी डे के द्वारा संविधान की उद्देशिका का शपथ दिलाया गया।

भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहब के योगदान को संजय सेंद्रे के द्वारा बताया गया। उन्होंने बताया कि बाबा साहब ने संविधान को 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन में कैसे पूर्ण किया। बाबा साहब के परिश्रम को याद किया गया। इस अवसर पर सुधा डोंगरे, सुनंदा गजभिए, शोभा जमुलकर के द्वारा कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

महिला सशक्तिकरण संघ की प्रदेश अध्यक्ष आयुष्मति प्रज्ञा बौद्ध ने कहा कि भारत के निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेने की आवश्यकता है। और उनके विचारों को जन-जन तक फैलाना ही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर राष्ट्रीय ट्रस्टी एस.आर. कनाडे ने अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए बताया कि हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्रात्मक संविधान है। जिस दिन हमारे देश की जनता को समता, स्वतंत्रता, बंधुता, सामाजिक और आर्थिक बराबरी एवं सभी को बराबर का न्याय मिलेगा, तभी हमारा देश सही मायने में लोकतंत्र कहलाएगा। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर भारतीय संविधान के शिल्पकार, महान अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, विधि विशेषज्ञ, महिलाओं के मुक्तिदाता और मजदूरों के उद्धारक थे। आज भले ही बाबा साहब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचारों की प्रासंगिकता निरंतर बढ़ रही है। आज देश की हर ज्वलंत समस्या का समाधान उनके दर्शन में निहित है।

कार्यक्रम में रीता, पूजा, इंदु धोक, उषा रावत, साधना नागवंशी, वंदना धारदे, रंजन वालवंदर, सोनल सुखदेव, कविता रंगारी, पुष्पलता भोईर, शशि महेश्वरी, अरुण डोंगरे, अर्चना घोड़ेसवार, आर्यन लोखंडे, राकेश डोंगरे, मनीष सुखदेव, एम.आर. तुरकान, टी.एल. मेश्राम, जितेंद्र मेश्राम, संतोष भालाधारे, बी.डी. डोंगरे, पी.सी. गजभिए, पार्षद अजीत वैद्य, मयूरेश वैद्य, यशवंत, ज्ञानी रामटेक आदि सम्मिलित रहे।

कार्यक्रम का संचालन प्रीतिमा गेडाम ने किया तथा आयुष्मति सुधा डोंगरे ने आभार व्यक्त किया।

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