Thursday, February 26, 2026
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षडयंत्र के तहत घटित संगीन घटनाओं की रोकथाम में सरकार हो रही विफल -विभिन्न संगठनों ने काले झण्डे और पट्टी बांध कर निकाली आक्रोश रैली,षडयंत्र व जातिगत उत्पीड़न से हुई आईपीएस वाई पूर्णकुमार व यूपी के हरिओम वाल्मीकि की आत्महत्या और सीजेआई पर हमले की संगीन घटनाओं का है मामला

मूकनायक / बी सी गोठवाल
नारनौल/ हरियाणा

13 अक्तूबर
षड्यंत्र के तहतआईपीएस वाई पूर्णकुमार की संदिग्धावस्था हुई मौत, यूपी में हरिओम वाल्मीकि की भीड़ तंत्र द्वारा पीट-पीट कर हत्या और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर हुए हमले आदि की इंसानियत को शर्मशार कर देने वाली संगीत घटनाओं के मामले में गत रविवार सायं महर्षि वाल्मीकि सभा के प्रधान जोगेंद्र जैदिया की अध्यक्षता में विभिन्न संगठनों द्वारा विशाल आक्रोश रैली का आयोजन किया और महर्षि वाल्मीकि सभा से उपायुक्त कार्यालय तक काले झंडों के साथ काली पट्टियां बांधकर व मोमबत्ती जलाकर पुलिस प्रशासन व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आक्रोश रैली निकाली । महर्षि वाल्मीकि सभा के प्रधान जोगेंद्र जैदिया ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि पूरे भारतवर्ष में इन घटनाओं पर लगातार रोष प्रदर्शन हो रहे हैं और मीडिया में भी जोर-जोर से छाया हुआ है परंतु इसके बावजूद सरकार इस मामले में मुख दर्शक बनी हुई है । जैदिया ने कहा कि विशाल रैली कर सरकार को कड़ा संदेश दिया कि अब उपेक्षित समाज उन पर दिन प्रतिदिन हो रहे अत्याचार, मर्डर व शोषण को बर्दाश्त नहीं करेगा । कोली सभा के प्रधान तोताराम, खटीक सभा के पतराम खिंची, अखिल भारतीय सफाई कर्मचारी संघ के दयाराम, सर्व अनुसूचित जाति संघर्ष समिति के प्रधान चन्दन सिंह जालवान, धानक समाज के पूर्व डीजीएम महेंद्र खन्ना, नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान महेंद्र सिंह व कबीर संस्था के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल, पूर्व प्रधान हरि सिंह बड़कोदिया, समिति उपाध्यक्ष एवं वाल्मीकि सभा के राजेश चांवरिया व अन्य संगठनों ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र के बड़े पद ऐसे लोगों के हाथों में है जिनकी मानसिकता बहुत छोटी है। खुद को सर्वश्रेष्ठ कहने वाले और सिस्टम को चलाने वाले ऐसे लोग किस हद तक जातिवाद में फंसे पड़े हैं, फिर आम लोग ऐसे अधिकारियों से न्याय के लिए क्या उम्मीद रखेंगे? इतने बड़े स्तर पर जातिवाद है तो हम आज कहां खड़े हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है और इसी का नतीजा है कि आज सरकार उपेक्षित समाज पर प्रतिदिन हो रहे मर्डर, अत्याचार, शोषण और जातिगत भेदभाव की संगीन व दर्दनाक घटनाओं को रोकने में विफल हो रही है । विभिन्न संगठनों ने यह भी चेतावनी दी गई कि सरकार यदि अब भी होश में नहीं आई तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे । इसके साथ यह भी निर्णय लिया गया कि सरकार द्वारा यदि दोषियों को यथाशीघ्र गिरफ्तार नहीं किया तो हरियाणा का उपेक्षित समाज एकजुट होकर विशाल आक्रोश रैलियां और धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा ।
रोष बैठक में महर्षि वाल्मीकि सभा उप प्रधान तारा चन्द, संयुक्त सचिव कुलदीप सिंह दुलगच, संकल्प फाउंडेशन
करतार सिंह जैदिया, भारतीय बौद्ध महासभा के प्रधान आशा पूनिया, सामाजिक विकास पथ की प्रेम यादव व रोशनी देवी, श्रेष्ठ फाउंडेशन के सुरेंद्र अंबेडकर, बाबूलाल पुरानी, अमरनाथ सिरोहा, महावीर, ललित, संजय ढ़ैणवाल, अशोक कुमार, प्रवीन, हरिराम सिरोहा, दलीप सिंह, शिव कुमार, ओम प्रकाश, महेंद्र सिंह संगेलिया, भारत गोड़वाल, गौतम, नितिन, राहुल सारवान, अशोक डूलगच, वासु चांवरिया, प्रदीप कुमार, आशुतोष ढ़ैणवाल, मास्टर महेश कुमार, महेश श्रेष्ठ , सुशील शीलू , रणधीर सिंह धीरू, एडवोकेट मंजीत यादव , शिन शाओलिंफो निरिस्सरो , महेश जांटीवाल आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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