Thursday, February 26, 2026
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फूले निःशुल्क पाठशाला के छात्रों ने मनाया संकल्प दिवस

मूकनायक

बिलासपुर , छत्तीसगढ़

जीवन का असली सौंदर्य लक्ष्य और उद्देश्य में छिपा होता है। जिस जीवन में कोई लक्ष्य न हो, वह केवल सांसों का सिलसिला भर रह जाता है। लक्ष्य तक पहुँचने के लिए केवल सपना देखना पर्याप्त नहीं, बल्कि उस सपने को साकार करने के लिए अटूट संकल्प और निरंतर प्रयास आवश्यक होते हैं। संकल्प ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को असंभव प्रतीत होने वाले मार्ग पर भी विजय दिला सकता है।

ऐसा ही एक ऐतिहासिक संकल्प 23 सितंबर 1917 को लिया गया था—जब डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने समाज को जकड़े हुए जाति प्रथा की जंजीरों को तोड़ने का अद्वितीय प्रण किया। उन्होंने दृढ़ स्वर में घोषणा की थी कि “मैं भारत से जाति व्यवस्था को समाप्त करूँगा”। यह केवल शब्द नहीं थे, बल्कि युगों से शोषित, दलित और वंचित समाज के लिए नई सुबह का उद्घोष था। यह संकल्प एक ऐसे आंदोलन की नींव बना जिसने भारतीय समाज की दिशा बदल दी और समानता, न्याय तथा मानवता की नई रोशनी फैलाई।

इसी अमर प्रेरणा को आत्मसात करते हुए फूले निःशुल्क पाठशाला के छात्रों ने 23 सितंबर को संकल्प दिवस के रूप में मनाया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने डॉ. आंबेडकर के संघर्षपूर्ण जीवन, उनके विचारों और समाज परिवर्तन की महान यात्रा को स्मरण किया। छात्रों ने यह समझा कि एक दृढ़ निश्चय केवल वर्तमान को ही नहीं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी आलोकित कर सकता है।

इस अवसर पर छात्रों ने यह संदेश दिया कि यदि बाबासाहेब जैसे महानायक ने जातिविहीन भारत का सपना संकल्प से साकार किया, तो हम सभी भी अपने जीवन में किसी महान उद्देश्य को अपनाकर समाज में परिवर्तन ला सकते हैं। संकल्प दिवस ने बच्चों के हृदय में यह दृढ़ विश्वास जगा दिया कि – संकल्प ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है।

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