Thursday, February 26, 2026
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एक तरफ नशा मुक्त अभियान दूसरी तरफ आष्टा जैसे शहर में बस स्टैंड पर शराब की दुकान, सरकार पर उठे सवाल ।

मूकनायक समाचार आष्टा जिला सीहोर।
संजय सोलंकी की रिपोर्ट।

सीहोर जिले में एक तरफ नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजन हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आष्टा जैसे शांति प्रिय शहर के बीचों बीच बस स्टैंड पर शराब की दुकान खोल दी गई है जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है। शहर वाशियो और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार एक ओर नशे के खिलाफ अभियान चला रही है, तो दूसरी ओर शहर के मुख्य स्थानों पर शराब की दुकानें खोलकर शहर को “शराबी” बनाने की कोशिश कर रही है।

नशा मुक्त अभियान की सच्चाई पर सवाल। जिले में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत 15 जुलाई से 30 जुलाई 2025 तक प्रदेश एवं शहरों में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिसका उद्देश्य नशे के खिलाफ लोगों को जागरूक करना है। लेकिन आष्टा बस स्टैंड जैसे व्यस्त और सार्वजनिक स्थान पर शराब की दुकान खोलने से इस अभियान की सार्थकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “एक तरफ सरकार नशा मुक्ति की बात करती है, दूसरी तरफ हमारे बच्चों और युवाओं के सामने शराब की दुकानें खोल रही है। यह दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है?

“शराब की दुकान से बढ़ती चिंता ।
आष्टा बस स्टैंड पर शराब की दुकान खुलने से स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं और व्यापारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। बस स्टैंड जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाके में शराब की दुकान होने से नशे में धुत लोगों के हंगामे और असामाजिक गतिविधियों का खतरा बढ़ सकता है। एक स्थानीय व्यापारी ने बताया, “यहां दिनभर यात्रियों, स्कूली बच्चों और महिलाओं का आना-जाना रहता है। शराब की दुकान खुलने से माहौल खराब हो रहा है ।

विरोध में उतरे लोग शराब की दुकान के खिलाफ आष्टा के नागरिकों ने विरोध शुरू कर दिया है।

कुछ सामाजिक संगठनों और महिलाओं ने जिला प्रशासन से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है। सरकार की चुप्पी जिला प्रशासन और आबकारी विभाग ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, शराब की दुकानों से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए सरकार मुख्य स्थानों पर दुकानें खोलने की नीति पर काम कर रही है। लेकिन इस नीति से नशा मुक्त भारत अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े? सीहोर जिले में नशे का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जिले के गांव-गांव में शराब, और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री हो रही है। नियमों को ताक पर रखकर शराब की दुकानें संचालित की जा रही हैं, जिससे नशे की लत में युवाओं की संख्या बढ़ रही है।

आगे क्या? नागरिकों ने मांग की है कि बस स्टैंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से शराब की दुकान को तुरंत हटाया जाए और नशा मुक्त भारत अभियान को और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। यदि प्रशासन ने इस मांग को नजरअंदाज किया, तो आष्टा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की संभावना है।

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