मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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भारतीय संस्कृति में ‘विनम्रता’ को मनुष्य का सबसे अनमोल आभूषण माना गया है। किसी के सामने आदर से सिर झुकाना या शालीन व्यवहार करना कमजोरी की निशानी नहीं है, बल्कि यह आपके मजबूत चरित्र और उच्च संस्कारों का परिचायक है। वृक्ष जब फलों से लद जाता है, तो वह नीचे की ओर झुक जाता है। ठीक इसी प्रकार, जिस व्यक्ति के पास ज्ञान, गुण और अच्छे संस्कार होते हैं, वह स्वभाव से सरल और विनम्र हो जाता है। अक्सर कुछ लोग झुकने को आत्मसम्मान की कमी या हार मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। दूसरों को सम्मान देने से हमारे भीतर का अहंकार नष्ट होता है। जब हम किसी बुजुर्ग, ज्ञानी या अपने से छोटे व्यक्ति को भी सम्मान देते हैं, तो बदले में हमें दोगुनी सद्भावना और आशीर्वाद मिलता है।
इतिहास गवाह है कि जिसने भी समाज में विनम्रता का रास्ता चुना, वह लोगों के दिलों पर राज करने लगा। लालबहादुर शास्त्री और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे अनेक महान व्यक्तित्व इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं, जिनकी सादगी और विनम्रता ने उनका कद पूरी दुनिया में बहुत ऊंचा कर दिया।
अहंकार व्यक्ति को एकाकी बनाता है, जबकि विनम्रता रिश्तों को जोड़ती है। जब आप दूसरों के सम्मान में झुकते हैं, तो समाज में आपका कद घटता नहीं, बल्कि आप और अधिक आदरणीय और अनुकरणीय बन जाते हैं। यह गुण समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देता है। इसलिए, आइए हम सब अपने भीतर इस महान मानवीय मूल्य को संजोएं और हर किसी के प्रति सम्मान का भाव रखें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

