स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया बोले—आयुर्वेद दवाखाने तक सीमित न रहे, हर घर की रसोई तक पहुंचे
चैंबर अध्यक्ष अशोक जीरावाला का आह्वान—टेक्सटाइल-डायमंड और आईटी के बाद आयुर्वेद में भी नंबर वन बने सूरत
मूकनायक समाचार । सूरत
सरसाणा स्थित सूरत इंटरनेशनल एग्जिबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में रविवार को गुजरात काउंसिल ऑफ आयुर्वेदिक एंड यूनानी सिस्टम्स ऑफ मेडिसिन के सहयोग से ‘GCAU वंदे आयुकॉन-3’ का भव्य आयोजन किया गया। दक्षिण गुजरात क्षेत्र में पंजीकृत आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सकों के लिए आयोजित इस एकदिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। सम्मेलन में दक्षिण गुजरात के इतिहास में पहली बार 1200 से अधिक आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सक एक ही छत के नीचे एकत्र हुए।
आयुर्वेद विश्व को संतुलित जीवन जीने की दिशा देता है : हर्ष संघवी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि आयुर्वेद भारत की समृद्ध और प्राचीन विरासत है, जिसने पूरे विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी प्रयासों से विश्व स्वास्थ्य संगठन का आयुर्वेद संबंधी वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र गुजरात के जामनगर में स्थापित हुआ है, जो पूरे देश के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता और गूगल सर्च के दौर में भी स्वास्थ्य के स्थायी समाधान के लिए लोगों का भरोसा आयुर्वेद पर लगातार मजबूत हो रहा है। ऋषि-मुनियों द्वारा दिए गए इस अमूल्य ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़कर विश्वभर में पहुंचाने में आयुर्वेद चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
आयुर्वेद जीवनशैली का हिस्सा बने : प्रफुल पानसेरिया
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने चैंबर ऑफ कॉमर्स की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि चैंबर समाज और उद्योग दोनों के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। भारत ने चरक संहिता से लेकर खगोल एवं अंतरिक्ष विज्ञान तक दुनिया को महत्वपूर्ण ज्ञान दिया है। हालांकि विदेशी आक्रमणों के कारण आयुर्वेद के क्षेत्र में जिस गति से अनुसंधान होना चाहिए था, उसमें बाधा आई।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जामनगर में वैश्विक आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र की स्थापना की दिशा में किए गए प्रयासों से भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति को फिर से वैश्विक पहचान मिल रही है।
एलोपैथी में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए पानसेरिया ने कहा कि दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। इससे बचने के लिए लोगों को अनुशासित जीवनशैली अपनानी होगी। आयुर्वेद मूल रूप से हमें प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने की ही सीख देता है।

