Home उत्तर प्रदेश 169 साल बाद भी इंसाफ का इंतजार: महुआ डाबर जनसंहार स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि, राष्ट्रीय सम्मान की उठी मांग

169 साल बाद भी इंसाफ का इंतजार: महुआ डाबर जनसंहार स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि, राष्ट्रीय सम्मान की उठी मांग

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169 साल बाद भी इंसाफ का इंतजार: महुआ डाबर जनसंहार स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि, राष्ट्रीय सम्मान की उठी मांग

मूकनायक/ दुर्गेन्द्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश

बस्ती। जिले के बहादुरपुर ब्लॉक स्थित मनोरमा नदी तट पर शुक्रवार को महुआ डाबर जनसंहार स्मृति दिवस मनाया गया इस अवसर पर महुआ डाबर संग्रहालय की ओर से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात-अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने महुआ डाबर के बलिदान को याद करते हुए शहीदों को न्याय और सम्मान दिलाने की मांग दोहराई।

इतिहासकारों के अनुसार 3 जुलाई 1857 को अंग्रेजी सेना ने महुआ डाबर गांव को तीन ओर से घेरकर बड़ी संख्या में स्त्री, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों की हत्या कर दी थी इसके बाद पूरे गांव को आग के हवाले कर उसे “गैरचिरागी” (बिना चिराग वाला गांव) घोषित कर दिया गया बताया जाता है कि इस घटना के बाद गांव का नाम राजस्व अभिलेखों से भी हटा दिया गया था।

महुआ डाबर संग्रहालय के निदेशक एवं शहीद जफर अली के वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि 1857 की क्रांति का यह जनसंहार इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं पा सका है उन्होंने दावा किया कि महुआ डाबर का बलिदान संख्या और क्रूरता दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था लेकिन आज भी इसका उल्लेख अधिकांश स्कूली इतिहास पुस्तकों में नहीं मिलता।

डॉ. राना ने केंद्र सरकार से 3 जुलाई को “महुआ डाबर बलिदान दिवस” के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर घोषित करने की मांग की उन्होंने 10 एकड़ में भव्य शहीद स्मारक, पार्क, सभागार, अतिथिगृह, लाइट एंड साउंड शो तथा “शहादत कॉरिडोर” विकसित किए जाने की भी मांग रखी साथ ही यूपी बोर्ड और एनसीईआरटी की कक्षा 6 से 12 तक की इतिहास पुस्तकों में महुआ डाबर जनसंहार को शामिल करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने संसद में विशेष कानून बनाकर 1857 के शहीद परिवारों के सम्मान और पुनर्वास की व्यवस्था करने, ब्रिटिश सरकार से आधिकारिक माफी की मांग उठाने तथा कथित रूप से लूटी गई ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी की भी बात कही इसके अतिरिक्त 1857 में अंग्रेजों का साथ देने वालों की संपत्तियों पर कार्रवाई की मांग भी रखी।

वक्ताओं ने बताया कि महुआ डाबर संग्रहालय के प्रयासों से यह शहीद स्थल उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के “स्वतंत्रता संग्राम सर्किट” में शामिल किया गया था और यहां 10 एकड़ में स्मारक निर्माण की घोषणा भी हुई थी हालांकि उनका कहना है कि वर्षों बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों ने सरकार से घोषणा को शीघ्र धरातल पर उतारने की मांग की।