Sunday, July 26, 2026
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तिलकपुर धाम सामूहिक हमला प्रकरण – दलित अधिकार केंद्र की फैक्ट-फाइंडिंग में सामाजिक बहिष्कार और बिजली-पानी बंद करने का सनसनीखेज खुलासा

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
अलवर/राजस्थान

अलवर। पुलिस थाना लक्ष्मणगढ़ के अंतर्गत ग्राम तिलकपुर धाम स्थित श्री हरचंद दास महाराज आश्रम में भागवत कथा के दौरान नामजद दबंग आरोपियों द्वारा हथियारों से लैस होकर प्राणघातक हमला करने के मामले में आज दलित अधिकार केंद्र के 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल द्वारा धरातलीय जांच अर्थात् फैक्ट-फाइंडिंग की गई। केंद्र के मुख्य कार्यकारी एडवोकेट डॉ. हेमंत मीमरोठ के नेतृत्व में ग्राम तिलकपुर धाम पहुंचे इस जांच दल ने गवाहों एवं पीड़ितों के विस्तृत बयान दर्ज कर विधिक दस्तावेजों का संकलन किया।
केंद्र के जिला समन्वयक शैलेष गौतम ने जांच में सामने आए तथ्यों का खुलासा करते हुए बताया कि दिनांक 24 जून 2026 को सायं करीब 05:30 बजे तिलकपुर धाम हरचंद दास आश्रम में भागवत कथा चल रही थी। तभी वहाँ पर आरोपी राजेश गुर्जर अत्यधिक शराब के नशे में एक बिना नंबर की चोरी की मोटरसाइकिल को तेज आवाज व अत्यधिक गति में लाकर कथा के मुख्य गेट के पास खतरनाक स्टंट करने लगा, जिससे वहाँ बैठे श्रद्धालुओं को चोटें आईं। जब उपस्थित श्रद्धालुओं ने उसे रोकने व समझाने का प्रयास किया, तो वह अत्यंत उग्र होकर सरेआम जातिसूचक एवं लैंगिक अपशब्दों से अपमानित करने लगा और बीच सड़क पर गेट के पास ही गाड़ी को पटक कर चला गया। इसके तुरंत बाद वह अपने परिवार के अन्य नामजद आरोपियों—देवी सिंह, जगदीश, रोहिताश, कालू, राजेश गुर्जर, जोगेश, रवीता गुर्जर सहित चार अन्य महिलाओं को लेकर आया। यह उग्र भीड़ अपने हाथों में धारदार फरसी, लाठियां व डंडे लेकर आई थी, जिन्होंने आते ही वहाँ मौजूद निर्दोष श्रद्धालुओं पर जानलेवा हमला बोल दिया। अपराधियों ने कथा सुनाने आए श्रद्धालुओं को बेरहमी से पीटा तथा वहाँ लगे माइक, कथा स्थल, मुख्य मंच, केबल और बिजली के तारों को पूरी तरह तोड़ दिया। इस सुनियोजित सामूहिक हिंसा में महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों सहित करीब 15 लोगों को गंभीर प्रकृति की चोटें आईं। हमलावरों ने सरेआम जातिसूचक एवं लैंगिक शब्दों से सरेआम अपमानित करते हुए कहा कि चमार ढेढ़, तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई कथा करने की और पूरे समाज को जान से खत्म करने की धमकियां दी गईं।
जांच में यह बेहद गंभीर और विचलित करने वाला तथ्य सामने आया कि दलित पीड़ितों द्वारा दिनांक 24 जून 2026 को ही पुलिस थाना लक्ष्मणगढ़ में नामजद प्राथमिकी दर्ज करवा दिए जाने के बाद, आरोपियों ने विधिक दबाव बनाने के उद्देश्य से पीड़ितों के खिलाफ ही एक पूरी तरह झूठा प्रति-प्रकरण दर्ज करवा दिया। इसके बाद गुर्जर समुदाय के दबंग आरोपियों द्वारा दलित पीड़ितों को कानूनी पैरवी से रोकने के लिए उनका पूर्ण सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। आरोपी बलधारी गुर्जर, रमसी गुर्जर, बच्चू गुर्जर, सरभो गुर्जर, धारा गुर्जर, सुंदर गुर्जर, केवल गुर्जर आदि ने मिलकर दलित बस्ती के सार्वजनिक रास्तों और खेतों में जाने वाली पगडंडियों को कांटेदार झाड़ियां व लकड़ियां लगाकर पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। दबंगों द्वारा पीड़ितों के घरों के बिजली के तार काट दिए गए हैं और सार्वजनिक टंकी से पानी की आपूर्ति को भी बलपूर्वक बंद कर दिया गया है, जिससे इस भीषण गर्मी में पीड़ित परिवारों के सामने पेयजल और जीवन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही कथा खत्म होने के बाद दलित समुदाय पर दोबारा जानलेवा हमला करने और समूल नष्ट करने की धमकियां दी जा रही हैं।
वर्तमान में पीड़ितों के बयान व चिकित्सीय मुआयना हो चुका है, किंतु पुलिस प्रशासन द्वारा मुख्य नामजद आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त, दलित पीड़ितों, मुख्य गवाहों व धार्मिक स्थल श्री हरचंद दास महाराज आश्रम को कोई पुलिस सुरक्षा उपलब्ध नहीं करवाई गई है, जिससे यहाँ के दलित समुदाय और धार्मिक स्थल के संतों के जान-माल को अत्यंत गंभीर खतरा बना हुआ है।
इस विधिक जांच के तत्काल बाद, दलित अधिकार केंद्र के जांच दल में सम्मिलित रहे केंद्र के मुख्य कार्यकारी एडवोकेट डॉ. हेमंत मीमरोठ, जिला समन्वयक शैलेष गौतम, सुनीता देवी बैरवा जिला समन्वयक दौसा, मांगीलाल बैरवा कार्यक्रम समन्वयक जयपुर, शंकर लाल बौद्ध, शेरसिंह बौद्ध भीम आर्मी, एडवोकेट गिर्राज सिंह गौतम, अजय कुमार, राजेश कुमार एवं मातादीन रेगर द्वारा सीधे अनुसंधान अधिकारी श्री कैलाश जिंदल उप पुलिस अधीक्षक लक्ष्मणगढ़ से मुलाकात की गई। जांच दल ने उन्हें धरातलीय विधिक परिस्थितियों से अवगत कराते हुए एक अंतरिम मांग पत्र सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से इस गंभीर प्रकरण के सभी नामजद आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने, धार्मिक स्थल, पीड़ितों व गवाहों को पुख्ता पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करवाने, समस्त पीड़ितों के बयान दर्ज करने, घटना में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार व मोटरसाइकिल को तुरंत जब्त करने, घटना से संबंधित समस्त प्राथमिक वीडियो को विधिक जांच पत्रावली में सम्मिलित करने, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण नियम 12 4 के अंतर्गत सभी पीड़ितों व घायलों को तत्काल उचित आर्थिक सहायता अर्थात् मुआवजा उपलब्ध कराने तथा संपूर्ण प्रकरण की बिना किसी सामाजिक या राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष, स्वच्छ एवं उच्च स्तरीय जांच करवाने की पुरजोर मांग की गई है।

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