Sunday, March 15, 2026
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धम्म दान से प्रज्ज्वलित हुई मानवता की ज्योतिभंते बोधि धम्म जी के स्वस्थ के लिए किया गया मंगल आशीर्वाद धम्म प्रबोधन कार्यक्रम

दमोह (बालाघाट): “दान वही श्रेष्ठ है जो निस्वार्थ भाव से करुणा की राह दिखाए।” इसी बुद्ध वचन को चरितार्थ करते हुए गत दिवस प्रज्ञादीप बुद्ध विहार, दमोह में ‘मंगल आशीर्वाद धम्म प्रबोधन’ कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन मात्र एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि धम्म के प्रति अटूट आस्था और संघ के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण बन गया।

श्रद्धा और प्रज्ञा का संगम-

कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य भंते बोधि धम्म जी द्वारा बुद्ध वंदना और मंगल मैत्री के साथ किया गया। भंते जी ने अपनी धम्म देशना में दानपारमिता, प्रज्ञा और शील के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समस्त प्राणियों के प्रति मैत्री भाव ही धम्म का मूल आधार है।

सामूहिक धम्म दान: एक नई रोशनी की ओर-

इस अवसर पर मंलाजखण्ड , दमोह,कचनारी क्षेत्रीय बौध्द समाज के उपासकों ने अपनी स्वेच्छा और सामर्थ्य से भंते जी के नेत्र उपचार हेतु धम्म दान राशि भेंट की।

समण संघ के राष्ट्रीय सदस्य मुख्य अतिथि आयुष्मान सुरेश बौद्ध ने प्राचीन बौद्ध संस्कृति और संघ दान के कल्याणकारी फल की विस्तृत व्याख्या की।
आल इंडिया समता सैनिक दल के प्रांतीय क्षेत्रीय सचिव आयुष्मान एस. आर. उके ने अनुकरणीय पहल करते हुए एकत्रित 21,042/- रुपये की राशि संघ को सौंपी इसके अलावा भी अन्य उपासकों द्वारा भंते जी को नगद दान दिया है। उन्होंने सभी को साधुवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि,”तथागत बुद्ध ने सुजाता की खीर और चुन्द के भोजन दान को सर्वश्रेष्ठ माना था। आज आपका यह धम्म दान भंते जी के स्वास्थ्य के लिए ‘महादान’ साबित होगा और उन्हें नई दृष्टि प्रदान करेगा।”

प्रमुख उपस्थिति एवं विचार-

प्रमुख अतिथि आयुष्मान एम. डी. गेडाम जी ने उपासकों की उदारता की सराहना करते हुए इसे भंते जी की समर्पित धम्म सेवा का प्रतिफल बताया। विहार कमेटी के संरक्षक आयुष्मान तेजलाल उके ने सभी से धम्म कार्यों में एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया। संस्कारकर्ता सुख-चैन सत्यटेके ने संस्कारो के आचरण को जीवन में उतारने पर बल दिया।
कार्यक्रम में महिला बाल विकास से आयुष्मती पवन सूर्यवंशी, स्वास्थ्य विभाग से आयुष्मती राजकुमारी रामटेके एवं रमाताई महिला मण्डल की स्वेजा उके एवं अन्य पदाधिकारियों ने भंते जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की मंगलकामनाएं कीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आयुष्मान पाण्डूलाल रामटेके (अध्यक्ष, डॉ. आंबेडकर मण्डल) ने सभी का आभार व्यक्त एवं कार्यक्रम का समापन करते हुए कहा कि,
“सब्ब दानं धम्म दानं जिनाति”
अर्थात: धम्म का दान सभी दानों में श्रेष्ठ है।

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