
मूकनायक/कमलेश लव्हात्रे
छत्तीसगढ़ प्रभारी
बिलासपुर के पंचशील बुद्ध विहार, टिकरापारा में 8 जनवरी 2026 को पहली बार बौद्ध धम्म ध्वज (पंचशील ध्वज) का आयोजन किया गया। यह दिन स्थानीय धम्म समुदाय के लिए स्मरणीय रहा क्योंकि बिलासपुर में इस प्रकार का व्यवहारिक तौर पर धम्म ध्वज उत्सव अब तक नहीं मनाया गया था।
सुबह के समय से ही उपासक-उपासिकाएँ विहार में एकत्रित होने लगीं। निर्धारित समय पर विहार परिसर में बौद्ध पंचशील धम्म ध्वज को फहराया गया। विशेषता यह रही कि ध्वजारोहण की जिम्मेदारी महिला उपासिकाओं ने निभाई, जिसने धम्म में समता और भागीदारी की भावना को वास्तविक रूप दिया।
धम्म ध्वज को फहराने के बाद बुद्ध-वंदना की सामूहिक रूप से ग्रहण की गई। सामूहिक वंदना के क्षणों में उपस्थिति में बैठे हर व्यक्ति ने धम्म के मूल सार—करुणा, मैत्री और विवेक—को अनुभव किया।
इसके बाद विहार में उपस्थित
अनामिका पाटिल ताई, सुजाता वाहने ताई और चेतना तम्हाने ताई ने धम्म ध्वज दिवस की पृष्ठभूमि, धम्म ध्वज के रंगों के अर्थ, और इस उत्सव की आधुनिक प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। उनके वक्तव्यों में विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला गया कि धम्म ध्वज सिर्फ एक प्रतीक नहीं बल्कि बुद्ध-धम्म की शिक्षाओं का दृश्य रूप है, जो पूरे विश्व में समान रूप से स्वीकार किया जाता है।
इस आयोजन ने बिलासपुर में धम्म-संस्कृति को एक नया अध्याय प्रदान किया। धम्म परिवार की एकता, अनुशासन और समर्पण ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले वर्षों में यह पहल और मजबूत एवं व्यापक रूप लेगी।

