मूकनायक/राष्ट्रीय ओमप्रकाश वर्मा
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आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में, हर कोई सफल होना चाहता है, आगे बढ़ना चाहता है। कई बार, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और स्वार्थ सामाजिक मानदंडों पर भारी पड़ जाते हैं। लोग अपनी इच्छाओं और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सीधेपन का दिखावा करते हुए अंदर से शातिर योजनाएं बना सकते हैं। वे जानते हैं कि सीधे रास्ते से हमेशा सफलता नहीं मिलती, इसलिए वे चतुराई (जिसे शातिरपन भी कहा जा सकता है) का सहारा लेते हैं। अच्छे नंबरों की उम्मीद के पीछे भी अहंकार और गलत इरादे छिपे हो सकते हैं । विश्वासघात का डर रहीम का एक दोहा इस बात को बखूबी समझाता है: “रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय। सुनि इठलैहैं लोग सब, बाटि न लैहै कोय” (अपने मन के दर्द को मन में ही रखना चाहिए, क्योंकि लोग इसे सुनकर हँसेंगे, कोई भी इसे बांटेगा नहीं)।
लोग अक्सर दूसरों पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पाते। उन्हें लगता है कि अगर वे अपना असली रूप दिखाएंगे, तो दूसरे उनकी कमजोरी का फायदा उठा सकते हैं या उन्हें धोखा दे सकते हैं। इस डर के कारण, वे अपने सच्चे इरादों और भावनाओं को छिपाकर एक सीधा और सरल बाहरी व्यक्तित्व बनाए रखते हैं। इंसान का बाहर से सीधा और अंदर से शातिर होना उसकी जटिल प्रकृति का परिणाम है। यह केवल बुराई का संकेत नहीं है, बल्कि अक्सर सामाजिक अस्तित्व, आत्म-सुरक्षा और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का मिश्रण होता है। यह व्यवहार मानव जीवन में संतुलन बनाने का एक प्रयास है, जहाँ व्यक्ति समाज में स्वीकार्य रहते हुए भी अपने हितों की रक्षा करने की कोशिश करता है। यह विरोधाभास हमें सिखाता है कि किसी को भी केवल उसके बाहरी दिखावे से नहीं आंकना चाहिए, बल्कि उसके व्यवहार के पीछे के कारणों और इरादों को समझने का प्रयास करना चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

