मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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यह कथन समाज की एक कड़वी हकीकत को दर्शाता है, जहाँ एक तरफ़ अमीर और शक्तिशाली वर्ग के बच्चे उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाते हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब बच्चों को उनके अपने देश में ही मूलभूत अधिकारों, जैसे कि शिक्षा और स्वास्थ्य, के लिए संघर्ष करना पड़ता है। यह असमानता शिक्षा प्रणाली और सामाजिक-आर्थिक नीतियों में खामियों को उजागर करती है, जो वंचितों को समान अवसर देने में विफल रहती हैं। आज हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहाँ अमीरों और गरीबों के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। यह खाई हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में।
शिक्षा का अधिकार प्रत्येक बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन मंहगी शिक्षा, आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के कारण कई बच्चे इस अधिकार से वंचित रह जाते हैं। कुछ लोग इस स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं, क्योंकि अगर गरीब बच्चे शिक्षित और सशक्त हो जाएंगे, तो उनका शोषण करना या उन्हें सस्ते मजदूर के तौर पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा। अमीर वर्ग और उनकी नीतियों के कारण ही ऐसे लोग द्वारा हाशिये पर खड़े उपेक्षित समाज के लोगों की आवाज को दबाया जाता है। इस समस्या का समाधान केवल तभी संभव है, जब समाज जागृत हो और शिक्षा के महत्व को समझें । सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना सरकार और समाज की जिम्मेदारी है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

